World War 1 History in Hindi | एक गोली से शुरू हुआ महायुद्ध

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World War 1 history in Hindi

World War 1 इतिहास में कुछ लड़ाई ऐसी भी लड़ी गई जिन्होंने पुरी दुनिया को झागजोर के रख दिया और वर्ल्ड वार वन ऐसी जंग थी जिसमें यूरोप समेत एशिया और अमेरिका ने भी भाग लिया इस वार को लड़ने के पीछे कई करण थे लेकिन इसका सबसे बड़ा करण एक गली बने वो गली जिसने ऑस्ट्रो हंगेरियन के होने वाले राजा को हमेशा हमेशा के लिए गहरी नींद में सुला दिया इसे गली ने अपना ऐसा असर दिखाए की पुरी यूरोप का नक्शा ही बादल गया लेकिन सोने वाली बात यह है की आखिर कैसे गली के चलते पुरी दुनिया इस लड़ाई में शामिल हो गई सेंसेटिव इनफॉरमेशन बीइंग लीड तू दी एनीमी

ओवर 13 लाख इंडियन सोल्जर सर्वर सीस पर डी ब्रिटिश ड्यूरिंग डी फर्स्ट वर्ल्ड वार व्हेन डी जर्मन स्टार्टड थिंकिंग ए अमेरिकन शिप और अमेरिकन मर्चेंट सिमेंस पर बीइंग लास्ट दें डेट रियली फोर्सड अमेरिका सोल्जर और अननोन नंबर ऑफ सिविल लाइंस अंपायर्स क्रम्बल रिवॉल्यूशन इन गोल्फ रॉक शेर और अमेरिका रोज तू विकम एन डोमिनेंट वर्ल्ड पार्क वर्ल्ड वार वन को हम यूरोपियन वार और ग्रेट वार जैसे नाम से भी जानते हैं इस वार में मास्टर डिस्ट्रक्शन को देखते हुए इसे ये सारे नाम दिए गए वर्ल्ड वार वन से पहले भी दुनिया में कई लड़ाई हुई थी लेकिन इससे पहले कभी इतने

First World War assassination of Archduke Franz Ferdinand leading to World War 1
एक गोली से शुरू हुआ प्रथम विश्व युद्ध, जिसने पूरी दुनिया का नक्शा बदल दिया।

बड़े लेवल पर करोड़ लोगों की जान नहीं गई थी ऐसा पहले बार हुआ था जब करोड़ों लोग बेघर हो गए और बड़े से बड़े देश टूट गए थे लोगों का मानना तो ये भी की इस जंग के बाद दुनिया में कभी कोई इतनी बड़ी जंग नहीं होगी और इस जंग से यूरोप में जो भी टेंशन है वह भी खत्म हो जाएगी जी करण इसे दो वार तू और जो अवार्ड का नाम भी मिला लेकिन ऐसा हुआ नहीं वर्ल्ड वार वन ने दुनिया में एक और जंग का बी बी दिया था दरअसल वर्ल्ड वार वन में ही एक घायल सैनिक को गली नहीं मेरी गई थी केवल ये सोचकर की ये पहले ही इतना घायल है कर भी क्या लगा बेशक वो समय कुछ

हीं कर पाया लेकिन आगे चलकर वहीं सैनिक थे एडोल्फ हिटलर के नाम से जाना गया जिसने वर्ल्ड वार 2 की शुरुआत की लेकिन सोने वाली बात यह है की कैसे इस वार में दुनिया दो भागन में बट कर एक भयानक जंग करने निकाल पड़े आखिर कैसे इस लड़ाई के चलते हमारे का एक सुपर पावर बन गया और आखिर कैसे बड़े से बड़े अंपायर इस जंग के अंत में बिखरने को मजबूर हो गए सबसे पहले 1914 के मैप पर नजर डालते हैं जहां एक तरफ आपको ऑस्ट्रिया हंगरी अंपायर देखने को मिलेगा जो एक समय पर इतना बड़ा था है जिसमें आज का स्लोवेनिया क्रोएशिया बोस्निया हरजागोविना सर्बिया रोमानिया यूक्रेन

स्लोवाकिया डी चकरी पब्लिक जैसे देश आते थे यहां तक की पोलिंग का कुछ हिस्सा और साथ ही साथ इटली का भी एक क्लोवेंस 1918 से पहले इसी अंपायर का पार्ट था 1914 में ऑस्ट्रिया हंगरी अंपायर का राजा जिसका नाम एंपरर फ्रांस जोसेफ वन था उसने अपनी बढ़नी उम्र के करण अपने भाई के बड़े बेटे आस डग फ्रांस फर्डिनेंड को ऑस्ट्रिया हंगरी का होने वाला राजा घोषित कर दिया जिसके बाद अपने पूरे राज्य का कार्यभार संभालना शुरू कर दिया जिसके लिए वो अपने देश में जगह-

World War 1 की पूरी कहानी एक हत्या से सुरु हुआ महायुद्ध ।

जगह जाकर वहां का जायजा लेने लगा इसी दौरान एक बार प्रिंस फ्रांस ऑर्डिनेंस और उनकी वाइफ सूफी को ऑस्ट्रिया
हंगरी अंपायर के साउथ में बेसलैया और हर्स गोविंद ए जाना पड़ा बस ने ऑस्ट्रिया हंगरी अंपायर का पार्ट नहीं था लेकिन बर्डन की संधि के करण ऑस्ट्रिया हंगरी अंपायर को बोस्निया के राजकाश को संभालने का हक मिला तथा ऑस्ट्रिया हंगरी ने इस हक का फायदा उठाया और पूरे बस नीर और हर से गोविंदा को अक्टूबर 1908 में एनएक्स कर लिया इस जबरदस्ती के राज से बोस्निया के लोगों में काफी गुस्सा था साथ ही ऑस्ट्रिया हंगरी अंपायर के उत्तर में बेस सर्विया कंट्री को भी बोस्निया के स्टेशन से एतराज था क्योंकि बस ने और सर्बिया दोनों ही राज्यों में स्लेविक लोग रहते थे इसलिए

Triple Alliance and Triple Entente World War 1 map
दो गुटों में बंटी दुनिया

बोसमियां पर ऑस्ट्रिया हंगरी के कब्जे से सर्बिया खुश नहीं था निक सेशन के बाद से ही बस ने तरह-तरह के रिवॉल्यूशनरी ग्रुप बने लगे थे इन ग्रुप में से ही एक ग्रुप यंग बस ने अभी भी था इस ग्रुप को ब्लैक हैंड के नाम से भी जाना जाता था जो अपनी आजादी की डिमांड करते थे अब जैसे ही इस ग्रुप को अंदाज़ हुआ की प्रिंस फ्रांस फर्डिनेंड बोस्निया के डर पर आने वाले हैं उन्होंने प्रिंस को जान से करने का प्लेन बना लिया प्रिंस जो बस ने गए तो रास्ते में इस ब्लॉक हैंड ग्रुप के 19 साल 28 [संगीत] 14 को 11:15 पर बोस्निया में ऑस्ट्रिया हंगरी के होने वाले राजा और उनकी वाइफ को

सबके सामने मार दिया गया वो भी एक 19 साल के लड़के के द्वारा जिसका साथ सर्बिया ने दिया था इसके बाद ऑस्ट्रिया हंगरी के के ऑफ जनरल स्टाफ प्रास डीआरएफ कॉर्नर्ड वन हट सिंदूर और फॉरेन मिनिस्टर लो पाल ग्राफ वांट्स टोल्ड ने राजा को सजेस्ट किया कितना बड़ा हादसा होने के बाद हम आसानी से युद्ध में उतार कर खुलेआम सर्बिया पर कब्जा कर सकते हैं हंगरी के राजा ने भी अपनी आर्मी के की बात को एक्सेप्ट किया और सर्बिया को एक उन एक्सेप्टेबल अल्टीमेट हम भेज दिया इस अनएक्सपेक्टबल अल्टीमेट में कई ऐसी शर्तें राखी गई थी जो एक स्वतंत्र देश के लिए मानना मुमकिन था इसमें पहले

शर्ट थी की सर्बिया गवर्नमेंट दक्षिणी स्लैबिक लोगों को यूनिट करने के पॉलीटिकल कैंपेन से दूरी बना ले ताकि बोसी ऑस्ट्रिया हंगरी का अधीन देश बनकर र सके चेतावनी में यह भी कहा गया था की सर्बिया आर्मी ऑस्ट्रिया आंदोलनकारी का साथ देना बैंड कर दे और सर्बिया प्रेस और स्कूल बुक्स में ऑस्ट्रिया के खिलाफ ऐंटिऑस्ट्रीम प्रचार करना छोड़ दे इन सभी शर्तों में छठी शर्ट कुछ यू बनाई गई थी की जिससे मानना सर्बिया के लिए बिल्कुल मुमकिन नहीं था छठी शर्ट में कहा गया था की प्रिंस के हत्यारा के खिलाफ सीरियस इन्वेस्टिगेशन चलाई जाए और इसमें

 

ऑस्ट्रिया डेलीगेट को भी हिस्सा लेने का मौका मिल सके साथ ही वो जी लफ्तान को सच और मिलन से गनोवेट जैसे सिविल सर्वेंट को रेस्ट किया जाए जो हत्या की साजिश से जुड़े हुए थे सर्बिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी की वो इस अल्टीमेट टीम का जवाब केवल 48 घंटा में दे युद्ध की कोई चेतावनी नहीं दी गई थी लेकिन यह साफ हो चुका था की इस चेतावनी को ठुकराने का नतीजा डायरेक्ट वार हो सकते हैं और हुआ भी कुछ ऐसा ही 25 जुलाई को सर्बिया ने अपना रिप्लाई भेजो और सर्बिया के डिमांड्स ना माने पर जुलाई 28 1914 को एस्ट्रो हंगरी ने सर्बिया पर वार

घोषित कर दिया जब वार केवल दो देश के बीच छेड़ा तो इसमें बाकी यूरोप एक और तो और पेशेंट कंट्रीज ने क्यों चलांग लगा दी 1914 का समय वह दूर था जब सारे यूरोपियन कंट्रीज अपनी टेरिटरी को मजबूत कर रहे थे सभी अपनी मिलिट्री को स्ट्रांग बनाने में लगे थे देश ने युद्ध के लिए पहले से ही तैयारी कर राखी थी जिसके करण सभी देश ने एक दूसरे के साथ एलियंस बनाना शुरू कर दिया था 1914 तक सभी देश ने आपस में एलाइंस की हुई थी जिसमें दो लाइन सबसे हम थी पहले ट्रिपल एलाइन जो की जर्मनी ऑस्ट्रो हंगरी और इटली के बीच हुई थी इसके अकॉर्डिंग अगर इन तीनों देश में से किसी

के ऊपर भी कोई और देश हमला करता है तो ये आपस में मिलकर उसके खिलाफ लड़ेंगे दूसरी संधि थी ट्रिपल ओनटैंड इस एलियंस में रसिया यूके और फ्रांस शामिल थे जब वार शुरू हुआ बस को हंगरी ने अपनी लायंस का हवाला देते हुए जर्मनी और इटली का दरवाजा खटखटाया जर्मनी और ऑस्ट्रिया हंगरी के अच्छे रिलेशंस थे लेकिन इटली ने जंग में पार्टिसिपेट करने से माना कर दिया उसने के अनुसार जब तीनों में से किसी कंट्री पर कोई दूसरा देश हमला करेगा तो उन्हें एकजुट होकर युद्ध करना है ना की खुद दूसरे देश पर हमला करने की कोशिश करनी है दरअसल इटली के इस क्लियर डिनॉयिल के पीछे एक और करण

था 1911 में हुए इटली तुर्किशोर में इटली ने अपने इन दोनों अले से मदद मांगी थी दोनों देश ने उसे वक्त सीधे यही कहते माना कर दिया था की इटली के पर्सनल इंटरेस्ट के वार में नहीं बल्कि अगर कोई इटली पर हमला करें तब हम साथ देंगे दूसरी और सर्बिया पर जब मुसीबत आई तो उन्होंने रसिया से मदद मांगी लेकिन इसके पहले ही औसतो हंगेरियन और रसिया के बीच यह डील हो चुकी थी की वो सर्बिया इवेशन में एक दूसरे के आड़े नहीं आएंगे लेकिन तभी रसिया में इस लावी लोगों ने आंदोलन शुरू कर दिया और अपने सम्राट से मांग किया की साउथ सर्बिया को इवेशन से

बचाना पड़ेगा क्योंकि वहां हमारे लोग रहते हैं इसके बाद रसिया को मजबूरन इस युद्ध में उतारना पड़ा रसिया का जंग में शामिल होने का एक और राजनीतिक करण था दरअसल सम्मान अंपायर ऑलरेडी ब्लैक सिप्पर डोमिनेट कर रहा था एसएमएस सेशन के बाद ओटोमन अंपायर पुरी तरह से ब्लैक सी पर कब्ज कर लेट वही दूसरी और रसिया का सर एक्सपोर्ट ट्रांसपोर्ट सर्विसेज ट्रेड के रास्ते ब्लैक होता था ऐसे का युद्ध में उतारना इकोनॉमिकल प्रोस्पेक्टिव से भी जरूरी हो गया इसीलिए जब जंग में रसिया शामिल हुआ तो ट्रिपलेट के तहत उसने यूके और फ्रांस से मदद मांगी लेकिन यूके का

मानना था की ये वार रसिया की है और ये उसे खुद ही लड़नी चाहिए वो खुद युद्ध में पार्टिसिपेट नहीं करना चाहता था वही फ्रांस ने भी चुप्पी साध राखी थी फ्रांस के नॉन क्लियर जवाब से जर्मनी काफी टेंशन में था क्योंकि अगर फ्रांस इस जंग में पार्टिसिपेट करता तो जर्मनी दोनों और से गिर जाता जिससे उसके लिए जंग जीत ना नामुमकिन हो जाता इसलिए फिल्म के हिसाब से जर्मनी ने फ्रांस पर हमला बोल दिया मैं आपके हिसाब से देखें तो जर्मन अंपायर रसिया और फ्रांस के बीच आता था क्योंकि रसिया एक बड़ा और ताकतवर देश था इसीलिए इस प्लेन के तहत जर्मन आर्मी को सबसे पहले

फ्रांस पर हमला करना था ताकि उसे जीत लिया जाए फिर जर्मनी अपनी पुरी मिलिट्री को मिलकर रसिया पर धावा बोलकर उसे भी जीत लगा और इस तरह जर्मनी यूरोप के बड़े भाग पर अपना कब्ज जमा लगा फ्रांस ने अपने और जर्मनी के बॉर्डर पर पहले से ही काफी हैवी मिलिट्री लगा राखी थी उन्होंने फ्रांस पर हमला बोलने के लिए बेल्जियम के रास्ते को अपनाया ऐसे में बेल्जियम जर्मनी को उनके देश में घुसने की इजाजत नहीं देता जिससे जर्मनी बेल्जियम पर हमला कर देता है यूके और बेल्जियम के बीच सालों पहले लंदन की संधि साइन हुई थी जिसके अकॉर्डिंग अगर कभी भी कोई बेल्जियम पर हमला करेगा तो यू की

उसकी मदद करेगा तो बस एक तरफ यू के बेल्जियम के सपोर्ट में वार में शामिल हो गए और दूसरी तरफ जब रसिया ने देखा की जर्मनी फ्रांस पर अटैक करने के लिए बेल्जियम को इनवाइट कर रहा है तो दूसरी तरफ से रसिया ने जर्मनी पर अटैक कर दिया और इस तरह यूरोप का एक बड़ा हिस्सा युद्ध में उत्तर पड़ा वर्ल्ड वार वन में दो ग्रुप आपस में लाड रहे थे जिसमें एक तरफ जर्मनी ऑस्ट्रिया हंगरी और ओटोमन अंपायर थे तो दूसरी और यूके फ्रांस इटली रसिया और सर भी आते इस वार में बाद में अमेरिका और जापान भी शामिल हुए उसे समय यूके दुनिया में लगभग 25% जगह को अकेले अपने कब्जे में

लेकर बैठा था जी करण यूके और जर्मनी की टेरिटरीज और कॉलोनी ने भी इस वार में पार्टिसिपेट किया जिसमें न्यू साउथ अफ्रीका रोड एशिया रोमानिया ग्रीस बेल्जियम कनाडा सर्बिया पुर्तगाल मॉन्टिनी गो और पोलैंड जैसे देश शामिल थे इंडिया ने भी इस वार में पार्टिसिपेट किया था क्योंकि उसे समय इंडिया पर यूके का राज था जी करण यूके ने अपने सोल्जर से भी ज्यादा इंडियन सोल्जर को वार में भेजो वार के दौरान जर्मनी ने अपने सभी सबमरीन को पानी में उतार दिया था जो यूके की नौस को उड़ने का कम करने लगे लेकिन गलती से जर्मनी ने यूके की एक ऐसी नवल शिव को टारगेट कर दिया

जिसमें अमेरिका के 128 पैसेंजर यूके से अमेरिका जा रहे थे और अटैक के करण वो सभी मारे गए जर्मनी ने अमेरिका से इस बात के लिए माफी भी मांगी थी लेकिन उसका कोई फायदा नहीं हुआ और उसके बाद अब वार में हमारे का भी शामिल था पहले तो जर्मनी काफी स्ट्रांग देखा गया फ्रांस में तो यह पेरिस तक पहुंच भी गए थे लेकिन यूके और अमेरिका सैनिकों ने वहां जर्मनी की आर्मी को के दिया रसिया में वर्ल्ड वार वन के आखिरी कुछ दोनों में काफी क्रांति हनी शुरू हो गए रसिया में इस दौरान अक्टूबर इवोल्यूशन भी देखा गया था जहां लेने ने रसिया की सत्ता को अपने हाथ में ले लिया और वार से

बैक आउट कर लिया इस बैक आउट के लिए लेने ने जर्मनी के साथ एक क्रिएटिव भी साइन की थी जिसके बाद रसिया ने गौर से एग्जिट कर लिया भाई जर्मनी की भी वार के और तक काफी हालात खराब हो गई थी जर्मनी के लोग अपने ही देश में एक दूसरे के खिलाफ लड़ने लगे थे जिसके करण जर्मनी काफी कमजोर होता ए गया और आखरी में जर्मनी ने आत्म समर्पण कर दिया जर्मनी ने 11 नवंबर 1918 को अपने हथियार दाल दिए और वर्ल्ड वार वन का अंत हुआ 28 जुलाई 1914 से लेकर 11 नवंबर 1918 के बीच वर्ल्ड वार वन लड़ी गई 4 साल की लगातार लड़ाई ने कई देश को खत्म कर दिया वार के बाद हर तरफ लोगों की नजरों में एक

खौफ देखने को मिला हर तरफ केवल तबाही और धूल ही धूल थी इस वार में कोई जीता कोई हर लेकिन अपनों को दोनों तरफ के लोगों ने को दिया था यहां एक बात समझना जरूरी है की सिर्फ एलियंस सी वर्ल्ड वार वन का करण नहीं था बल्कि इस वक्त यूरोप में नेशनलिज्म इंपिरियलिज्म और मिलिट्री चर्म पर थे राष्ट्रवाद होना तो कोई गलत बात नहीं थी लेकिन यहां का नेशनलिज्म कुछ ऐसा था जहां राजा से लेकर प्रजा तक के मां में सिर्फ एक ही बात थी की सिर्फ उनका देश महान है और अच्छा है बाकी के सारे देश इनफीरियर है निकले दज के है जहां इन देश का मानना था की पुरी दुनिया

उन्हें के महानता के नीचे रहे सिर्फ उन्हें ही राज करने का हक है अब राज करना ऐसे तो संभव था नहीं अब एक अंपायर की मिलिट्री से भी इन देश को शांति नहीं मिली तो इन्होंने दूसरे देश के साथ मिलकर एलियंस बनाए जो की वर्ल्ड वार होने का सबसे बड़ा करण बना ना तो यह लाइन से होती और ना ही ये देश एक दूसरे पर वार करते एलियंस इसकी बात तो हम कर ही चुके हैं अब बात करते हैं नेशनलिज्म की नेशनलिज्म 1914 के समय में वार का एक बड़ा करण था वो ऐसे की सभी देश से विलियंस के मां में न्यूज़पेपर के जारी ज्यादा से ज्यादा देश प्रेम जागने की कोशिश कर रहे

थे जिससे लोग नेशनलिज्म की भावना से मिलिट्री जॉइन करें और वार में पार्टिसिपेट करें उसे समय नेशनलिज्म को इतना ज्यादा सपोर्ट किया जान लगा की घर घर से लोग आर्मी में भारती होने के लिए मोटिवेट होने लगे नेशनलिज्म के करण ही यूरोप के सारे देश वर्ल्ड वार वन में अपने देश को पावरफुल दिखाने के लिए पार्टिसिपेट करते गए और वार और ज्यादा इंक्रीस होती गई इंपिरियलिज्म का मतलब होता है अपने देश को और अपने देश की टेरिटरी को बड़ा करना जिसके लिए 1914 के समय में पूरे यूरोप में अपने अपने देश को पावरफुल दिखाने के लिए सभी देश जगह-जगह एन्क्टेशन करने लगे थे

जिससे जो हिस्सा कमजोर दिखता वह उसे अपने देश में शामिल करने के लिए उसे पर कब्जा कर लेट इस कब्जे के पीछे केवल अपने देश की टेरिटरी इंक्रीज करना नहीं बल्कि कब्जा किया हुए देश की वेल्थ को लूटना भी आता था जैसे ब्रिटेन ने किया था ब्रिटेन ने भारत को सोनी की चिड़िया के रूप में देखा और उसे पर कब्जा कर लिया जिससे भारत के पैसे और रिसोर्सेस से ब्रिटेन अपनी जोली भर सके तो बस वर्ल्ड वार से पहले पूरे यूरोप की नजरे अफ्रीका और एशिया पर थी सभी यूरोपियन देश अफ्रीका और एशिया के ज्यादा से ज्यादा हिस पर कब्जा करना चाहते थे जिसमें सबसे

ज्यादा आगे ब्रिटेन था ब्रिटेन के पूरे दुनिया में उसे समय सबसे ज्यादा कॉलोनी थी जिसके कंपटीशन में बाकी देश भी लगे थे यह कंपटीशन भी आगे चलकर वार का एक बड़ा करण बना क्योंकि विदेश आपस में कंपीट करने में इतने मगन हो गए थे की वो किसी भी हद तक जान के लिए तैयार थे सभी देश का अपने देश की मिलिट्री को स्ट्रांग बनाना और आर्म्स रेस में पार्टिसिपेट करने का दूर 20th सेंचुरी में स्टार्ट हुआ और 1914 तक यूरोप में इस रेस का करेज सबसे ज्यादा देखा गया जिसमें जर्मनी ने सबसे ज्यादा बाढ़ चढ़कर हिस्सा लिया 1914 तक जर्मनी ने अपने मिलिट्री को काफी स्ट्रांग बना लिया था जी

करण वर्ल्ड वार वन में जर्मनी स्टार्टिंग में काफी स्ट्रांग दिखाई भी दिया लेकिन ग्रेट ब्रिटेन ने भी जर्मनी की तरह अपनी मिलिट्री पर ज्यादा पैसा खर्च किया लोगों को आर्मी में जान के लिए मोटिवेट किया और अपने वार इक्विपमेंट्स में भी सुधार किया जिससे ब्रिटेन जर्मनी से मुकाबला करने से एक बार भी नहीं कतराया यही नहीं 1914 तक जर्मनी और ग्रेट ब्रिटेन केवल यही दो देश थे जिनका आर्मी के साथ साथ नेवी पर भी अच्छा कंट्रोल था जी करण वार के दौरान दोनों देश ने जमीन से लेकर पानी पर भी लड़ाई लड़ी थी इस सबके भी सिटीजंस का इन सभी देश की सरकारे ने ऐसा ब्रेनवाश किया

था की वह वार और मिलिट्री को ही ताकतवर होने की पहचान माने लगे ज्यादा से ज्यादा लोगों को आर्मी में शामिल होने के लिए ट्रेनिंग दी जान लगी जिससे सभी देश एक दूसरे को देखकर अपने अपने देश की मिलिट्री को बड़ा करने लगे और वार को एक मंत्र सॉल्यूशन समझना लगे वर्ल्ड वार वन के करण सभी देश फाइनेंशियल तोर पर बुरी तरह से बिखर गए थे जंग में पार्टिसिपेट करने और उसे आखिरी तक लड़ने के खातिर सभी देश का सरकारी खजाना खत्म हो गया था सभी देश ने अपने देश को बड़ा दिखाने के लिए देश की फिक्र किया बिना जंग में खूब पैसा लगाया जिसमें सबसे ज्यादा जर्मनी और ग्रेट

ब्रिटेन का नाम सामने आया वार के समय सभी देश पर लोन की भी बड़ी परेशानी थी जिसके करण मनी प्रिंटिंग जैसे कैसे भी सामने आने लगे जिससे ये गरीबी की दलदल में फास्ट चले गए कल मिलकर फर्स्ट वर्ल्ड वार के बाद सभी देश में गजब का इन्फ्लेशन रेट देखा गया जिससे उसे समय की इकोनामी पर फर्क पड़ा वर्ल्ड वार वन के और ने पुरी चारमीनार की इसको भी हमेशा के लिए खत्म कर दिया था जिसमें रूस के जर निकोलस सेकंड जर्मनी के कैसर विलियम सेकंड ऑस्ट्रिया के सम्राट चार्ल्स और ओटोमन साम्राज्य के सुल्तान आते थे इन सभी सत्ताधारियों से इनका देश छन लिया गया और कई नए देश बनाया गया

जिसमें ऑस्ट्रिया हंगरी तो अपना एक अलग देश ही बन कर रहा लेकिन जो देश मिडिल ईस्ट में आते थे वो सभी ग्रेट ब्रिटेन और फ्रांस के बीच बांट दिए गए बात अगर ओटोमन अंपायर की करें तो इससे तुर्की बना दिया गया बाकी सभी टेरिटरीज और कॉलोनाइजर को आपस में जंग जितने वाले देश ने बांट लिया वर्ल्ड वार वन खत्म होने के बाद सोसाइटी पुरी तरह से चेंज हो गए चाइल्ड बर्थ रेट कम होने लगी जिसका में करण था युद्ध में नौजवानों का शाहिद हो जाना इसके अलावा लोगों ने अपनी जमीन कोड़ी और वो किसी और देश जाकर बेसन के लिए मजबूर हो गए लेकिन इस समय सबसे ज्यादा बड़ा चेंज औरतें के

रोल में देखा गया जैसे वार के दौरान औरत का काफी मेजर रोल रहा क्योंकि वार में सभी पुरुष और यंग लोग जान लगे थे तो ऑफिस क और बाकी कम काई करने के लिए लोगों की कमी होने लगे जिसके करण स्त्रियों ने वार के दौरान मर्दों की जगह लेकर फैक्टरीज और ऑफिस में कम करना शुरू कर दिया यही नहीं कई देश ने तो वार के बाद और तो ज्यादा राइट्स देने शुरू कर दिए जिससे अनेक जीवन स्टार में काफी बदलाव देखने को मिला उसे समय सबसे ज्यादा चर्चा वोटिंग राइट्स की हुई थी जो स्त्रियों को जंग खत्म होने के बाद पहले बार दिया गया था इसके अलावा सोसाइटी के एलिट और अपर क्लास लोगों ने

अपना दर्ज को दिया था वार के बाद मिडिल यंग और लोअर क्लासमें और वूमेन ने अपने देश को बनाने में सबसे ज्यादा कम किया था वर्ल्ड वार वन दुनिया का पहले ऐसा युद्ध था जिसमें करीब 20 मिलियन लोग मारे गए और 21 मिलियन लोग घायल हुए थे मारे गए लोगों में लगभग 9.7 मिलियन सी के लोग और 10 मिलियन आम नागरिक शामिल थे वर्ल्ड वार वन के बाद बेरोजगारी और फैमिन जैसे स्थितियां ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया था वर्ल्ड वार वन ने ना केवल यूरोप में बल्कि पुरी दुनिया में अपनी एक अलग छाप छोड़ी इस वार के और में कई त्रुटीज भी साइन हुई जिसमें पेरिस संधि ट्रीटी का संत जॉमिन

ट्रीटी का ट्रायल ट्रीटी का न्यूली ट्रीटी का सर्वर और ट्रीटी का वर्ब्स आए थे हालांकि ये ट्रीटी इतनी ज्यादा हमिलिएटिंग और एक तरफ थी जिसने वर्ल्ड वार 2 के बीच भी वो दिए 1914 में इंडिया उन दोनों ब्रिटिश कॉलोनी थी हमारे ऊपर ब्रिटेन का शासन था लेकिन अंग्रेजन के अत्याचारों के खिलाफ अब यहां भी रिवॉल्यूशन होने लगे थे 1915 में महात्मा गांधी के भारत वापसी के बाद स्वतंत्रता के आंदोलन और ज्यादा बाढ़ गए थे इन्हीं दोनों ब्रिटिश के युद्ध में उतारने के फैसला से भारत पर भी असर पड़ा उन्होंने लगभग 15 लाख भारतीय सैनिकों को युद्ध में उतार दिया हमारे सैनिकों ने

युद्ध में एलाइड पावर के तरफ से युद्ध किया जहां अंग्रेजी सी यूरोप के थोड़े आसन युद्ध के मैदाने में और बेसिस में लाड रही थी वही हमारे सैनिकों को ज्यादातर अफ्रीका और मिडिल ईस्ट कंट्रीज में भेजो गया भारतीय आंदोलनकारी को ग रहा था की शायद वर्ल्ड वार वन में कॉरपोरेट करने से अंग्रेज हमें इंडिपेंडेंस कंट्री बनाने देंगे लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ वर्ल्ड वार के अंत में हमारे लगभग 1 लाख 20 हजार सैनिक या तो घायल थे शाहिद हो चुके थे या वो मिसिंग थे बस 30000 के आसपास ही सुरक्षित सैनिक भारत लौटे उल्टे हमारे यहां रौलट एक्ट और जलियांवाला बैग

हत्याकांड जैसे कम हुए जिससे फ्रीडम रिवॉल्यूशन और तेज हुए वर्ल्ड वार वन में लगभग 70 हजार सैनिक शाहिद हुए और कभी भारत नहीं लोट पे शहीदों के सम्मान में ही अंग्रेजी सरकार ने तब दिल्ली में जो इंडिया वार मेमोरियल बनवाया जिसे आज हम इंडिया गेट के नाम से जानते हैं हमें उम्मीद है की आपको हमारा ये वीडियो पसंद आया होगा आगे हम और भी ऐसे ही इनफॉर्मेटिव वीडियो आपके लिए लेट रहेंगे तब तक के लिए हमारा वीडियो लाइक कर दे और ऐसे इंटरेस्टिंग वीडियो के लिए इसे सब्सक्राइब कर ले

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