Kargil War
ठीक हूं मैं लटपट किया फिर भी बंदूक उठाकर 10-10 को एक ने मारा और गिर गए होश गवाह के अब अंत समय आया तो का गए की हम मरते हैं खुश रहना देश के प्यारों अब हम तो सफर करते हैं लता दीदी के गले से निकले हुए इस सुरीले गाने को सुनकर आज भी आंखें नाम हो जाति है लेकिन कुछ ऐसे ही हालात थे कारगिल युद्ध के जब हमारे देश के एक-एक जवान 100-100 दुश्मनों को मार कर अंत में खुद ही शाहिद हो गए और बदले में हमें दे गए कारगिल युद्ध की जीत एक ऐसी जीत जिसके बाद पाकिस्तान ने दोबारा कभी भारत पर अटैक करने की जरूर नहीं की लेकिन सोने की बात यह है की भारत पाक के बीच कारगिल वार हुआ

ही क्यों क्यों हमारे देश के जवानों को अपने ही देश के कारगिल पहाड़ियों को बचाने के लिए अपने प्राण की आहुति देनी पड़े आखिर में ये कारगिल का वार जितना हमारे देश के सैनिकों के लिए इतना मुश्किल क्यों था और कैसे इस 3 महीने तक चले युद्ध में भारत ने विजय हासिल की 16th अक्टूबर 1971 में आखिरकार पाकिस्तान भारत के आगे अपने 93000 सैनिकों के साथ सुरेंद्र कर देता है और इसी वक्त पाकिस्तान दो टुकड़ों में बट जाता है इंडियन आर्मी की मदद से बांग्लादेश अपना स्वतंत्र झंडा फहराना है इस वार में पाकिस्तान आर्मी की ऐसी बेइज्जती हुई जो की इतिहास में अब तक कभी
नहीं हुई थी भारत से मिली इस कारी हर से एक पाकिस्तान फौजी बड़ा दुखी हुआ उसका नाम था परवेज मुशर्रफ जैसे वर्ल्ड वार वन में हिटलर ने घायल होकर जर्मनी को हार्ट देखा था और एलिस कंट्रीज को हारने का सपना बुनकर दोबारा जर्मनी को वर्ल्ड वार 2 की आज में धकेल दिया था ठीक वैसे ही मुशर्रफ भी 1971 की हर का बदला लेने के लिए भारत के खिलाफ पलटवार करने की साजिश रचना लगा इसी बीच 1984 में भारत ने दोबारा से पाकिस्तान को सियाचिन में धूल जाता दी जिससे की मुशर्रफ और बौखला गया इसी बीच चिंत पावर बन चुका था और पाकिस्तान भी चीन की मदद से एटम बम बनाने की कोशिश में लगा
हुआ था पड़ोस में बढ़ते खतरे को देख भारत 1998 में दूसरी बार 11थ और 13th मे को एटॉमिक बम की सक्सेसफुल टेस्टिंग करता है और इसके कुछ ही दिन बाद पाकिस्तान भी परमाणु परीक्षण कर लेट है अब दोनों ही देश एटॉमिक पावर की लिस्ट में शामिल थे और अगर दो परमाणु संपन्न देश के बीच वार होता तो यह वार बहुत ही घटक हो सकता था इसलिए सिचुएशन को समझते हुए प्रधानमंत्री अटल बिहार वाजपेई 19th फरवरी 1999 को दिल्ली से लाहौर की बस यात्रा करते हैं और पाकिस्तान प्राइम मिनिस्टर नवाज शरीफ के साथ 21st फरवरी 1999 को हिस्टोरिकल लाहौर डिक्लेरेशन को साइन करते हैं जो अटल बिहार
Kargil War की अनसुनी कहानी: विक्रम बत्रा से टाइगर हिल तक
वाजपेई जी लाहौर में बस से उतारे तो उनका बहुत ही गम जोशी से स्वागत किया गया और उनको 21 तपन की सलामी दी गई लेकिन कोई भी इंडियन यह नहीं जानता था की यही टोपी तीन महीने के बाद भारतीय सैनिकों के साइन पर गिरेंगे 1998 के दौरान जब मुशर्रफ पाकिस्तान आर्मी के बना तो उसने भारत के खिलाफ ऑपरेशन बदर को लॉन्च करने का प्लेन बनाया इस ऑपरेशन के तहत पाकिस्तान आर्मी का मकसद नेशनल हाईवे 1a पर कब्जा करके सियाचिन ग्लेशियर में इंडियन मिलिट्री पोजीशंस को वीक करना था और साथ ही सियाचिन से इंडियन आर्मी की सप्लाई चैन को कट ऑफ करना था पाकिस्तान मिलिट्री चाहती थी की

जी तरह पाकिस्तान ने बांग्लादेश को खोया था इस तरह भारत भी लद्दाख से हाथ दो बैठे और कश्मीर विवाद में भारत का पालदा कमजोर पद जाए ऐसे में नेगोशिएट करते हुए लद्दाख के बदले भारत-पाकिस्तान को कश्मीर देने के लिए राजी हो जाए अपने इन्हीं मां सुभ को हकीकत में बदलने के लिए परवेज मुशर्रफ पाकिस्तान प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को बिना बताए कारगिल क्षेत्र में इनफील्ट्रेटर करवा देता है कारगिल के बटालिक टाउन के एक लोकल शेफर्ड ताशी नाम के ऑल अपनी कोई हुई आंख खोजना के लिए निकले थे दूरबीन से देखने पर उन्हें पठानी ड्रेस पहने कुछ लोग पहाड़ी रीजन में
पत्थर तोड़कर बनकर बनाते हुए दिखे जिनके पास हथियार भी थे काशी को डाउट हुआ की ये लोग लॉक के उसे पर से आए हैं इसीलिए ये खबर उन्होंने जल्द ही इंडियन आर्मी के नेरिस्ट पोस्ट को दें इस इन फिल्ट्रेशन को चेक करने के लिए जब इंडियन आर्मी ने अपने जवानों को भेजो तो इंडियन ट्रूप्स को लगा की इन फिल्टर मुजाहिदीन है लेकिन 5 मैं को पाकिस्तान आर्मी ने कारगिल में भारत के एलिमिनेशन डंप को निशाना बनाया और उसे डिस्ट्रॉय कर दिया 10 मैं तक इंडियन आर्मी जान गई थी की पाकिस्तान की तरफ से अक्सर और मुझको सेक्टर में भारी इन्फ़िल्टरेशंस हुई है और हर इलाके में
इनकी टैक्स में बदलाव से इंडियन आर्मी यह भी समझ गई थी की ये कम मुजाहिदीन का नहीं बल्कि पाकिस्तान आर्मी का है ये खबर साफ थी की पाकिस्तान भारत के लॉक वाले हिस में 150 किलोमीटर तक फेल चुके हैं कारगिल का पूरा हिस्सा ऊंची पहाड़ियों और दारा और वालुज में बता हुआ है ऐसे में पाकिस्तानियों ने भारत के कई पिक्स और वालुज को ऑक्युपी कर लिया था मशको वाली के कई निकले हिस पॉइंट 5353 माउंटेन पिक जो की लॉक पर बना हुआ है और इंडियन पाकिस्तान के बॉर्डर की तरह कम करता है उसे पुरी तरह कैप्चर कर लिया था कागर गांव बटालिक रेंज और चोर मतवाली के माउंटेन पिक्स और तुतक

विलेज के सदन एरियाज में भी पाकिस्तान सैनिकों ने घुसपैठ कर दी थी और ऑक्युपी कर लिया था इस तरह से कई सारे स्ट्रैटेजिक माउंटेन पिक्स को पाकिस्तानियों ने कब्जा करके रखा था ये पाकिस्तान घुसपैठ 1971 में किया गए शिमला एग्रीमेंट का डायरेक्ट ब्रिज था जिसे प्रेसिडेंट जुल्फिकार अली भुट्टो और इंदिरा गांधी के बीच साइन किया गया प्रधानमंत्री अटल बिहार वाजपेई तक पहुंची तो उन्होंने कैबिनेट मीटिंग को बुलाया और टमाटर को डिस्कस किया भारत सरकार पाकिस्तान सरकार से इस इंट्रूजन का जवाब मांग रही थी लेकिन नवाज शरीफ और पाकिस्तान आर्मी बार-बार इस लॉक क्रॉसिंग को दिन कर
रहे थे और का रहे थे की पाकिस्तान आर्मी ने लॉक पर नहीं की है बल्कि ये कम मुजाहिद दिन का है लेकिन पाकिस्तान का ये झूठ भी ज्यादा दिन तक पर्दे पर नहीं र पाया और जल्द ही इंडियन आर्मी को पाकिस्तान आर्मी के कई डॉक्यूमेंट मिले जिससे ये साबित हो गया की ये कम पाकिस्तान आर्मी का है ये कनफ्लिक्ट अब कारगिल वार की शक्ल ले चुका था जिसका असर इंटरनेशनल लेवल पर भी देखा जा सकता था दुनिया में यह पहले बार था जब दो न्यूक्लियर पावर देश जंग में एक दूसरे के खिलाफ खड़े थे इस कनफ्लिक्ट में भारत की पहले कैजुअल्टी 15th मे को हुई जब जाट
रेजीमेंट के कैप्टन सौरभ कालिया और पांच जवानों को पाकिस्तान सैनिकों ने बंदी बना लिया था यह जवान का अक्सर एरिया में पेट्रोलिंग के लिए गए थे तब पाकिस्तान आर्मी द्वारा उन पर हमला किया गया था 22 दिन तक इन सैनिकों को पाकिस्तान आर्मी ने अपनी कैद में रखा और इन पर एक्सट्रीम टॉर्चर किया गए उसके बाद जब इन जवानों के अमृत शरीर को भारत को लौटाया गया तब इंडियन सोल्जर के सब्र का बंद टूट गया अब सामने एक ही रास्ता था और वो था भारत की जीत और पाकिस्तानियों को एक ऐसा सबक देना जो वह शकर भी कभी ना भूल पे 10th मैं 1999 को इंडियन आर्मी ने
पाकिस्तान आर्मी के खिलाफ ऑपरेशन विजय को लॉन्च किया इसका मकसद कारगिल के इलाके पर भारत के कंट्रोल को वापस से एस्टेब्लिश करना और पाकिस्तान आर्मी को वहां से भगाना था इसलिए हजारों सैनिकों को कश्मीर से कारगिल की तरफ मोबिलाइज किया गया उसे वक्त भारत के आर्मी के वेद प्रकाश मलिक थे जिन्होंने ऑपरेशन विजय की कमान संभाली थी और 16000 फिट पर दुश्मनों से लड़ने के लिए इंडियन मिलिट्री स्ट्रीट्स को भी प्लेन किया था इस युद्ध में इंडियन आर्मी का फर्स्ट अप्रोच कारगिल की स्टेप पहाड़ियों को चढ़ना था जिसे चढ़ना में 12 से 13 घंटे का वक्त लगता था अब क्योंकि कारगिल की
नंगी और खड़े पहाड़ियों पर दुश्मन आसानी से इंडियन सोल्जर को देख सकते थे इसीलिए चढ़ाई का वक्त रात को चुनाव गया लेकिन मुश्किल यह थी की कारगिल की पहाड़ियों पर एक तो हड्डी जमा देने वाली ठंड थी और ऊपर चढ़ना के साथ ही ऑक्सीजन की कमी होने वाली थी ऐसे में ऊपर चढ़ते हुए या तो सैनिक अपने साथ पानी और खाना ले जा सकते थे या तो वेपंस लेकर दुश्मनों को के सकते थे इन सब के अलावा अगर थोड़ी भी लापरवाही होती तो ऊपर बैठे दुश्मन आसानी से इंडियन आर्मी पर ढाबा बोल सकते थे लेकिन हमारे जांबाज ऑफिसर्स और सोल्जर हर सिचुएशन के लिए तैयार थे इंडियन आर्मी के इस ऑपरेशन को
सक्सेस करने में इंडियन और फोर्स और इंडियन नेवी ने भी एक बड़ा कृष्ण रोल निभाया इस दौरान उन्होंने ऑपरेशन सफेद सागर और ऑपरेशन तलवार लॉन्च किया 25th मे को कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी ने इंडियन और फोर्स को अटैक के लिए को अहेड दिया और 26 मैं को इंडियन और फोर्स ने ऑपरेशन सफेद सागर को लॉन्च किया एयरफोर्स को प्रधानमंत्री अटल बिहार वाजपेई की और से साफ इंस्ट्रक्शन दिए गए थे की किसी भी हाल में वो लॉक को पर ना करें ऑपरेशन सफेद सागर कारगिल वार में इंडियन और फोर्स द्वारा लॉन्च किया गया और ऑपरेशन था जिसे कारगिल की पोस्ट से पाकिस्तान आर्मी को खदेड़ना के लिए चलाया
गया था जब कारगिल कनफ्लिक्ट बढ़ाने लगा और दुश्मन कारगिल की पिक्स पर बैठे हुए आर्मी को लगातार क्षति पहुंच रहे थे तब आर्मी को एयरफोर्स की मदद की जरूर हुई ऐसी भयावास्थिति में एयरफोर्स सामने आए जिसने इंडियन आर्मी को कर दिया और साथ ही साथ पाकिस्तान आर्मी को इंगेज करके आर्मी को सपोर्ट किया जिससे की इंडियन आर्मी कॉम्बैट कर सके साथ ही साथ पीस पर चढ़ते हुए सैनिक ज्यादा बाहर लेकर नहीं चढ़ सकते थे ऐसे में एयरफोर्स उन्हें जरूरी समाज भी और ड्रॉप कर रही थी 25 मैं को एयरफोर्स द्वारा आर्मी को और कवरेज देने के लिए इस ऑपरेशन को लॉन्च किया गया था शुरुआत में
आर्मी की जरूर थी की और फोर्स उन्हें मी 17 हेलीकॉप्टर की मदद मुहैया कराए और और फोर्स ने किया भी ऐसा ही लेकिन कारगिल की पहाड़ियों में स्ट्रीट्स से एयरफोर्स को भारी नुकसान झेलना पड़ा इस दौरान 28 मैं को मिल्क 27 फाइटर एयरक्राफ्ट चलने वाले फ्लाइट लुटिनेंट नचिकेता जो बटालिक सेक्टर में पाकिस्तान ठिकानों पर हवाई हमला कर रहे थे इस समय उनके प्लेन को मार गिराए गया और उन्हें कैप्चर कर लिया गया लेकिन इंटरनेशनल प्रेशर के चलते 4 जून को पाकिस्तान आर्मी द्वारा उन्हें वापस लोटा दिया गया अपनी स्ट्रेटजी को बदलते हुए इंडियन और फोर्स ने इंडियन आर्मी को बटर
और सपोर्ट देने के लिए निक 21 मेक 23 और मेक 27 को उसे करना शुरू किया और मिराज 2000 को लेजर गाइड बम से प्रेसीजन अटैक्स में लाया गया इनकी मदद से रीफोर्स ने दुश्मनों की पोजीशंस की रिकी कर उन पर और स्ट्राइक की और पाकिस्तान आर्मी की पोजीशंस की जानकारी इंडियन आर्मी से शेर की इस जानकारी की मदद से ही आर्मी एक बेहतर प्लेन के साथ दुश्मनों को टारगेट कर पे या ऑपरेशन मौत को बुलावा देने जैसा था इस मेयर फोर्सेस के जांबाज सिपाही हथेली पर जान लेकर इस ऑपरेशन को कामयाब बनाने में लगे थे कहानी में आगे बढ़ते हुए आपको ये भी बता दे की कारगिल गर्ल कहानी जान

वाली जांबाज पायलट गुंजन सक्सेना ने पहले बार वार जॉन में अपना कॉपर चलाया था और भारत की पहले महिला पायलट बनी जिन्होंने अवार्ड जॉन में फ्लाई किया इस दौरान उन्होंने ऑपरेशन विजय में काफी हम भूमिका निभाई उन्होंने अवार्ड जॉन के खतरे में भारतीय जवानों के लिए डेली एसेंशियल की चीज़ ड्रॉप की और कई भारतीय सोल्जर जो वार में शाहिद हो गए थे उन्हें पहाड़ियों से वापस भी लाई तीन महीने तक चले इस कनफ्लिक्ट में इंडियन नेवी भी पाकिस्तान को गर्ने में पीछे नहीं रहे इंडियन आर्मी को सपोर्ट करने और पाकिस्तान को चारों तरफ से गर्ने के लिए
नेवी ने इसी दौरान ऑपरेशन तलवार को लॉन्च कर दिया जिससे की अगर किसी भी सूरत में पाकिस्तान फौजी कारगिल को ऑक्युपी करने की कोशिश करें तो इंडियन नेवी अपने मिसाइल्स के साथ पाकिस्तान को घुटने के बाल झुकना पर मजबूर कर दे नेवी इस वार में पाकिस्तान की पोजीशन को कमजोर करना चाहती थी इस ऑपरेशन का मकसद पाकिस्तान पर प्रेशर बिल्ड अप करके उसे युद्ध से पीछे हटाना था इसीलिए मिज्जू 1999 में इंडियन नेवी ने अपने पूर्वी और वेस्टर्न फ्लाइज को अरब सी में शिफ्ट कर दिया भारत की नवल पावर पाकिस्तान की नवल पावर से 7 गुना ज्यादा हुआ करती थी इसीलिए जब भारतीय नौसेना ने
खुलेआम अपनी बैटलशिप से कराची के आसपास नवल ब्लॉक्ड लगे तब पाकिस्तान नेवी ने चुप्पी सादे रखें इंडियन नेवी की स्ट्रीट्स से पाकिस्तान इस कादर प्रेशर में ए गया होगा की उन्होंने अपने तेल टैंकर्स और मेजर वार्षिप्स को कराची बंदरगाह से हटाकर मकरान में शिफ्ट कर दिया था ताकि भारतीय जहाज के साथ सीधे टकराव से बच्चा जा सके हालांकि ऑपरेशन तलवार के तहत इंडियन नेवी ने पाकिस्तान पर डायरेक्ट अटैक नहीं किया लेकिन उन्होंने अपनी इस रणनीति से पाकिस्तान का सी ट्रेड और तेल सप्लाई पुरी तरह कट ऑफ कर दिया था 14 जुलाई को इंडियन नेवी का ऑपरेशन खत्म हो
गया और प्राइम मिनिस्टर अटल बिहार वाजपेई ने इसे एक मैं सिर्फ सक्सेस बताया कारगिल पर वापस कंट्रोल जमाने के लिए भारत के जांबाज सैनिक जहां ब्रेवरी से लाड रहे थे वही कारगिल में उन्हें कई एक्सट्रीम कंडीशंस का सामना करना पद रहा था ग्राउंड लेवल पर पाकिस्तान आर्मी के पास हाइट का एडवांटेज था वो पहाड़ी की चोटियों से लगातार फायर करके जवानों के मुश्किल बड़ा रहे थे साथ ही ज्योग्राफिकल कंडीशंस भी भारत के सैनिकों के विपरीत कम कर रही थी कारगिल की ठंडी पहाड़ियों उन दोनों – टेंपरेचर में थी यहां केवल ऑक्सीजन लेवल कम था बल्कि और प्रेशर भी काफी कम था इतनी
लंबी चोटियों को पर करते हुए जो सैनिक आगे बाढ़ रहे थे उनमें से कई एल्टीट्यूड सिकनेस का शिकार भी हो रहे थे इंडियन आर्मी इस फुलफिल्ड वार के लिए पुरी तरह तैयार नहीं थी इसीलिए शुरुआत ही स्टेज में भारत को खास सफलता नहीं मिली लेकिन जल्दी भारतीय आर्मी ने अपनी स्ट्रेटजी बदली nh1a पर पाकिस्तान आर्मी की कांस्टेंट सीलिंग के बीच इंडियन आर्मी ने कारगिल के चैलेंज को ओवरकम किया और दिन के समय होने वाले फ्रंटल अटैक्स के बचाएं आर्मी ने अपने अटैक्स की टेक्निक्स को बदला और चढ़ाई का वक्त रात को चुनाव गया दोनों लिंग की लड़ाई ऊंची पहाड़ियों की
पीठ पर लड़ी गई जो की एक दिशाएं और ऐतिहासिक लड़ाई थी जिसने युद्ध में भारत की जीत को लगभग पक्का कर दिया था इस पहाड़ी पर पाकिस्तान आर्मी कब्जा करके बैठी हुई थी और यहां की पहाड़ियों को रीकैप्चर करना इंडियन फोर्सेस के लिए सबसे मुश्किल हो रहा था 16000 की हाइट पर यहां टेंपरेचर माइंस में था और पाकिस्तान आर्मी कंटीन्यूअस सीलिंग करके इंडियन आर्मी के लिए यहां पहुंचाना और भी मुश्किल बना रही थी खुफिया जानकारी के हिसाब से पाकिस्तानियों ने यह बात फैलाई की केवल कर से पांच गोष्ठियों ने ही तो लो लिंग पर कब्जा कर रखा है लेकिन यह बात गलत साबित
हुई पाकिस्तान आर्मी की एक पुरी की पुरी कंपनी टोलो लिंक की पहाड़ी पर तैनात थी ऐसे में भारतीय सैनिक केवल अंधेरी रातों में अपने मिशन को अंजाम देते थे जब रोशनी कम होती थी ताकि उनकी मूवमेंट की नजर पाकिस्तान आर्मी पर ना पड़े अक्सर उन्हें गोला बारूद और 2 किलो राशन में से किसी एक आइटम को चुना होता था और हमारे सिपाही वार इक्विपमेंट का चुनाव करते थे इस पहाड़ी पर चढ़ना वाली आर्मी यूनिट में 18 ग्रेडियर्स बटालियन और कई ऑफिसर्स शामिल थे जिसमें से एक कैप्टन अजीत सिंह भी थे आगे मेजर राजेश अधिकारी ने भी अपनी कंपनी लीड करते हुए
पहाड़ी पर चढ़ना की कोशिश की वह अपनी कोशिश में सफल हो ही जाते लेकिन जब वो ऊंचाई से कुछ मी ही दूर थे तब घुस बैठियों ने इन्हें देख लिया और फायरिंग शुरू कर दे इस फायरिंग में मेजर राजेश अधिकारी शाहिद हो गए और उनके दो साथ ही भी हैंड तू हैंड कॉम्बैट में शाहिद हो गए आगे पाकिस्तान आर्मी की तरफ से भारी फायरिंग हुई जिससे बचाने के लिए सैनिकों को पत्थरों के पीछे पोजीशन लेनी पड़े अब जब सैनिक जरा भी मूवमेंट करते वैसे ही पाकिस्तान आर्मी की तरफ से फायरिंग शुरू हो जाते इससे हुआ ये की भारतीय सैनिकों की फौजी बीच में ही फैंस गई इनके पास ग्रेनाइट्स भी खत्म हो
रहे थे एसएमएस स्थिति को सुधारने के लिए 90 सोल्जर के साथ पहाड़ की चढ़ाई शुरू की 12 जून को उन्हें अपने मिशन में तब सफलता मिले जब वह बीच में फैंस सैनिकों तक पहुंच गए अब करनाल रविंद्र नाथ भी दुश्मन से हजार फिट की दूरी पर थे यहां उन्होंने अपने सोल्जर को आखरी बार जीत की कसम दिलाई और आगे बाढ़ गए जिसके बाद हमारी फौजी उत्साहित होकर आगे बढ़ 4 घंटे तक लगातार फायरिंग जारी रही 10000 से ज्यादा शेल्स और 120 आर्टिलरी गंस को फायर किया गया प्लेन के मुताबिक सैनिकों को तीन टीम्स में डिवाइड किया गया और उन्हें नाम दिया गया अर्जुन भीम और अभिमन्यु पहले टीम को
टास्क दिया गया की वह फ्रंटल अटैक्स को संभालेंगे जबकि दूसरी टीम लोअर रिट्ज से जाकर पीछे से अटैक करेगी और तीसरी टीम कर फायर देगी इस लड़ाई में पाकिस्तान सैनिक को पीछे की तरफ से मेजर विवेक गुप्ता के प्लाटून ने अटैक किया यहां हैंड तू हैंड कॉम्बैट फाइटिंग हुई और उसे लड़ाई में भारत ने मेजर विवेक गुप्ता और अपने 6 सोल्जर को को दिया लेकिन इन सभी सैनिकों की कुर्बानी जय नहीं गई और भारत ने वापस टोलो लिंक पर अपना कंट्रोल जमा लिया इस लड़ाई में हम जीत तो गए लेकिन भारत माता ने अपने कई लाल इस युद्ध में को दिए इसके बाद इंडियन फोर्सेस ने कसम खाई की अब चाहे
कोई भी महीना क्यों ना चल रहा हो इस युद्ध का अंत होकर ही रहेगा टाइगर हिल और टोलो लिंक पर कब्जा जमा कर सेकंड राजपूताना राइफल्स ने ये साबित कर दिया था की युद्ध की स्थिति जैसी भी हो भारतीय सिपाही अपने खून से अपनी जीत का इतिहास लिखेंगे 13 जून को एक तरफ जहां भारत ने टोलो लिंग पर एक बड़ी विक्ट्री हासिल कर ली वहीं 15 जून को अपनी डूबती हुई नव को बचाने के लिए पाकिस्तान पीएम नवाज शरीफ युद्ध में 30 फायर के लिए अमेरिका का दरवाजा खटखटा रहे थे एक तरफ माने को तैयार नहीं थे की यह कम पाकिस्तान सी का था वही दूसरी तरफ उनकी मांग थी की अमेरिका युद्ध में
पाकिस्तान का साथ दें मगर इन हरकतों से पाकिस्तान की इंटरनेशनल इमेज अब बाकी देश को भी साफ हो गई थी इधर वाजपेई जी ने अमेरिका राष्ट्रपति बिल क्लिंटन को टेलीफोन पर बातचीत में साफ कर दिया था की पाकिस्तान या तो खुद इंडियन टेरिटरी को खाली कर दें वरना भारत जी तरह से बेहतर समझेगा उन्हें बाहर निकाल फेंकेगा उस प्रेसिडेंट बिल क्लिंटन ने भी भारत की साइड लेते हुए युद्ध में इंटरव्यू करने से माना कर दिया था बल्कि अमेरिका ने पाकिस्तान को पब्लिकली फटकार लगाकर और उसे जल्द से जल्द अपने सैनिकों को लॉक से बाहर बुलाने को कहा था अमेरिका से ठुकरा जान के
साथ ही पाकिस्तान इंटरनेशनल लेवल पर खुद को कॉर्नर महसूस कर रहा था जाहिर था एक ऐसे राष्ट्र के साथ कोई नहीं खड़ा होना चाहता था जिसने बेवजह एक बड़े युद्ध को जन्म दे दिया था और अमेरिका भी एक गलत राष्ट्र की साइड लेकर वर्ल्ड पावर के तोर पर अपनी क्रेडिबिलिटी खत्म नहीं करना चाहता था इधर जंग के मैदान में टोलो लिंग पर मिली सफलता के बाद भारतीय सैनिक अब रुकना नहीं चाहते थे उन्हें अपने एक-एक भाई के शरीर से गिरी हुई खून की हर बूंद का हिसाब लेना था फिर क्या था तो लो लिंग के नॉर्थ में एक और ऊंची पहाड़ी थी जिसे नाम पॉइंट फाइव
वन फोर जीरो दिया गया था इसकी ऊंचाई 17000 फिट थी इसके अलावा टोलो लिंक और पॉइंट फाइव वन फोर जीरो के बीच 10 हाय ग्राउंड्स थे जिन्हें हम कहा जाता था इंडियन आर्मी द्वारा इन हम इसको तो कैप्चर कर लिया गया था लेकिन पॉइंट फाइव वन फोर जीरो को वापस पन अभी बाकी था और इसे वापस रीकैप्चर करने का टास्क लिटिनमेंट करनाल योगेश कुमार जोशी को सोप गया था इसके बाद सोल्जर के दो ग्रुप को फॉर्म किया गया जिसमें एक ग्रुप की कमान लतानंद संजीव सिंह जमवाल को सोप गए वहीं दूसरे ग्रुप को लीड कर रहे थे लिटिनमेंट विक्रम बत्रा जिनका कोड नाम था
शेर शाह इनका प्लेन था की हिल्स को दो डिफरेंट डायरेक्शन से क्लाइंब किया जाए 20 जून को दोनों ग्रुप ने चढ़ाई शुरू की और दोनों अपने इस ऑपरेशन में सक्सेसफुल रहे विक्रम बत्रा की कमांड में उनके ग्रुप में फ्रंटल अटैक संभाले और हैंड तू हैंड कॉम्बैट में उन्होंने कर दुश्मनों को देर कर दिया कई घंटा के हैवी कॉम्बैट के बाद 0.
5140 को इंडियन सोल्जर ने कैप्चर कर लिया और अपने विक्ट्री सिग्नल के तोर पर विक्रम बत्रा ने ये दिल मांगे मोर सिग्नल भी दिया 0.5140 पर विक्ट्री भारत के लिए एक बहुत बड़ी डिप्लोमेटिक जीत थी इस पॉइंट से पाकिस्तान के कई डॉक्यूमेंट भी रिकवर किया गए थे जिससे ये सच भी सामने ए गया था की इस युद्ध में पाकिस्तान अपनी इज्जत बचाने के लिए अब तक केवल झूठ बोल रहा था भारत की ऊंची पहाड़ियों पर जैसे जैसे इंडियन आर्मी का कब्ज हुआ वैसे-वैसे पाकिस्तान ना केवल युद्ध के मैदान में कमजोर पद रहा था बल्कि इंटरनेशनली भी उसकी स्थिति कमजोर पड़ती जा रही थी सेकंड जुलाई को पाकिस्तान पीएम
नवाज शरीफ ने अमेरिकन प्रेसिडेंट बिल्कुल रोकने के लिए मदद मांगी थी जी पर अमेरिका ने नवाज शरीफ को साफ कर दिया था की इसके लिए पाकिस्तान को लॉक से अपनी सी को हटाना होगा और कश्मीर मामले में अमेरिका पाकिस्तान की कोई मदद नहीं करेगा थर्ड जुलाई को नवाज शरीफ अमेरिका गए और फोर्ट जुलाई को अमेरिकन प्रेसिडेंट मिल्क क्लिंटन के साथ मीटिंग करने के बाद वह लॉक से अपनी सी हटाने के लिए राजी हो गए दूसरी तरफ इस युद्ध में अमेरिका का इंवॉल्वमेंट इसीलिए भी ज्यादा था क्योंकि अमेरिका की खुफिया एजेंसी सिया ने अमेरिका सरकार को जानकारी दी थी की पाकिस्तान अपने
न्यूक्लियर हथियारों को मूव कर रहा है ऐसे में अमेरिका को डर था की अगर ये युद्ध लंबा चला तो पाकिस्तान कहानी इस जंग को न्यूक्लियर वार में ना बादल दे इसीलिए अमेरिका की तरफ से पाकिस्तान पर कारगिल से पीछे हटे का प्रेशर था टेक्निकल युद्ध कर जुलाई को खत्म हो चुका था जब पाकिस्तान कारगिल से अपनी सी हटाने के लिए तैयार हो गया था लेकिन ग्राउंड रियलिटी काफी अलग थी पाकिस्तान के सैनिक अब भी भारत की चोटियों को छोड़कर गए थे और उनकी तरफ से अभी भयंकर जवाबी हमले हो रहे थे कई जगह पर पाकिस्तान सैनिक कुछ चौकिया से पीछे है जाते थे लेकिन वो दूसरी चौकिया पर कब्जा कर लेते
थे ऐसे उन्होंने भारतीय सरजमीं से बाहर फेंकना इंडियन और फोर्स और इंडियन आर्मी पर निर्भर करता था फोर्थ जुलाई को जहां डिप्लोमेटिक पाकिस्तान इस युद्ध से पीछे है गया था वही जंग के मैदान में भारतीय जवानों की बहादुर से भारत टाइगर हिल को भी कैप्चर करने में सफल हो गया था टाइगर हिल 17000 फिट की एक ऊंची छोटी थी जो की दरस रीजन को डोमिनेट करती थी इस छोटी पर बैठे सैनिक दास की हर छोटी-बड़ी एक्टिविटी पर नजर रख सकते थे हालांकि मैं के महीने में भी भारत ने इस पहाड़ी को कैप्चर करने की कोशिश की थी लेकिन उसे यूनिट को हैवी कैजुअल्टी झेलनी पड़ी थी
इसीलिए भारत ने कुछ हफ्तों तक टाइगर हिल को कैप्चर करने का कोई प्लेन नहीं बनाया लेकिन थर्ड जुलाई को भारतीय सैनिकों ने फिर टाइगर हिल को रीकैप्चर करने के लिए स्ट्रेटजी बनाई ये कम 18 ग्रे वीडियो और अर्थ बटालियन सिख रेजीमेंट को सोप गया इससे पहले इंडियन एयरफोर्स सेकंड जुलाई को पहले ही दुश्मन के ठिकानों पर अपनी नजर गड़ा चुकी थी फिर थर्ड जुलाई की रात को भारतीय सैनिकों ने टाइगर हिल की चढ़ाई शुरू की अब क्योंकि टाइगर हिल की एक साइड पुरी तरह वर्टिकल थी इसीलिए इंडियन आर्मी ने रणनीति बनाई की वह मल्टी-डायरेक्शनल एसॉल्ट का सहारा लगी यानी ट्रूप्स का एक
ग्रुप वर्टिकल साइड से पहाड़ी की छोटी पर चढ़कर घुस बैठियों को प्राइस करेगा वही 86 सामने से अटैक कर अपने मिशन को अंजाम देंगे आगे हुआ भी ऐसा ही 18 ग्रेनेडियर्स की टीम ने रस्सी और माउंटेन इक्विपमेंट की मदद से इस मिशन को अंजाम दिया इसमें 18 गदर की घटक प्लाटून को लिटिनमेंट बलवंत सिंह लीड कर रहे थे इन्होंने साढे कर बजे टाइगर हिल पर पहुंचकर दुश्मनों को सरप्राइज कर दिया था दूसरी तरफ इंडियन और फोर्स की हैवी आर्टिलरी सेलिंग और और अटैक्स ने दुश्मनों की हालात को पहले ही खस्ता कर दिया था इसलिए जब हूं कॉम्बैट फाइटिंग हुई तो दुश्मनों ने अपने 12
साथियों को को दिया था जबकि भारत की तरफ से छह कैजुअल्टी हुई थी घायल हुए सोल्जर में एक सैनिक 19 साल के योगेंद्र सिंह यादव भी थे जिन्होंने खुद से इस मिशन पर जान के लिए वॉलिंटियर किया था यह रॉब को लीड करते हुए आगे बाढ़ रहे थे लेकिन दुश्मनों को इनके बड़े में पता चला और उन्होंने मशीन गण और रॉकेट की फायरिंग से ने घायल कर दिया लेकिन जख्मी हालात में भी अपनी चढ़ाई कंटिन्यू करते रहे और दुश्मनों पर ग्रेनेड फेंका और कर दुश्मनों को मार गिराए इन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर दूसरे बनकर को भी निशाना बनाया इनकी बहादुर से मोटिवेट होकर बाकी सोल्जर में
भी जोश आया जिसके बाद सब ने बहादुर दिखाकर टाइगर हिल पर भी जीत का झंडा लहराकर भारत का सर फखर से ऊंचा कर दिया बादल ऑफ टोलो लिंग और टाइगर हिल की जीत से जहां जवानों का मनोबल बाढ़ गया था वही भारत की इस जीत की खुशी को हर भारतीय माना रहा था लेकिन कोई नहीं जानता था की इस खुशी के साथ एक ट्रेजेडी भी देश का इंतजार कर रही है इसकी शुरुआत सेवंथ जुलाई 1999 को हुई जब कैप्टन विक्रम बत्रा की लीड में जम्मू और कश्मीर राइफल्स को पॉइंट 4875 को कैप्चर करने के लिए भेजो गया इस मिशन पर उनके बाकी कंपनियों थे कैप्टन अनुज नायर कैप्टन बत्रा ने इस मिशन में अपनी वीरता दिखाई
हुए दुश्मनों को धूल जाता दें फिजिकल फाइट में उन्होंने अकेले ही पाकिस्तान फाइटर को मार गिराए उनके शरीर पर लगी छोटन के बावजूद वागले दुश्मन की और बाढ़ है और उन पर ग्रेनेड फेक कर दुश्मनों को साफ कर दिया साथ जुलाई को मिशन ऑलमोस्ट कंप्लीट हो ही चुका था और bharat.4875 पर जीत जाहिर करने के लिए तैयार था लेकिन इसी बीच कैप्टन बत्रा एक दूसरे सोल्जर लेफ्टिनेंट नवीन अब रुको रेस्क्यू करने के लिए बनकर से बाहर निकले तभी दुश्मन की गली सीधे कैप्टन बत्रा की चेस्ट पर आकर लगी और भारत ने अपने वीर शेर शाह को को दिया भारत को 4875 पर जीत तो
हासिल हुई लेकिन इस जीत की कीमत देश को बहुत महंगी पड़ी जम्मू और कश्मीर राइफल्स के 13थ बटालियन के 24 साल के कैप्टन विक्रम बत्रा इस युद्ध में जीत तो गए लेकिन एक घायल साथी को बचाने के दौरान उन्होंने अपनी जान गाव दी देश को जीत की खुशी देकर खुद कैप्टन बत्रा इतनी छोटी उम्र में चल बेस भारत ने अपने दो ही रोज कैप्टन बत्रा और कैप्टन अनुज नायर को को दिया था आज के दिन 0.
4875 को बत्रा टॉप के नाम से जाना जाता है 0.4875 की बोतल के साथ ही कारगिल में भारत की जीत भी ते थी एक तरफ जहां भारत ने दरस का कंट्रोल अपने हाथ में ले लिया था वही सेवंथ जुलाई को इंडियन आर्मी बटालिक सेक्टर में जोबार हाइट्स को भी कैप्चर करने में सफल हो चुकी थी बटालिक तुर्क सब सेक्टर जो की सियाचिन के करीब था उसे भी इंडियन आर्मी ने अपने कंट्रोल में ले लिया था भारत की युद्ध में यह डोमिनेशन पाकिस्तान को वार में पीछे के रहा था और इस का नतीजा था की 11th जुलाई तक पाकिस्तान ट्रूप्स बटालिक सेक्टर पीछे हटे लगे थे साथ ही ट्वेल्थ जुलाई को इंटरनेशनल प्रेशर में आकर पाकिस्तान ट्रूप्स को पूरे
कारगिल से पीछे हटाना पड़ा था 14th जुलाई को प्रधानमंत्री अटल बिहार वाजपेई ने ऑपरेशन विजय को एक बड़ी सक्सेस डिक्लेअर कर दिया था लेकिन ये युद्ध ऑफीशियली 26 जुलाई को खत्म हुआ जब इंडियन और फोर्स और आर्मी ने कंफर्म किया की कारगिल से घुसपैठिए पुरी तरह से एकत हो चुके हैं इसीलिए आज इस दिन को कारगिल विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है क्योंकि इस दिन भारतीय सैनिकों की बहादुर सैक्रिफिस और दृढ़ निश्चय की बदौलत भारत को ना केवल उसकी सरजमीं वापस मिले बल्कि दुनिया भर ने भारत की मिलिट्री पावर का लोहा माना इस हर से बौखलाए परवेज मुशर्रफ अक्टूबर के महीने
में अपने ही देश के कॉन्स्टिट्यूशन को सस्पेंड कर देता है वह देश में इमरजेंसी डिक्लेअर कर देते हैं और पीएम नवाज शरीफ का तख्त पलट कर खुद पाकिस्तान के प्रेसिडेंट बन जाते हैं बाद में खुलासा भी होता है किस युद्ध के के स्ट्रेटजिस्ट पाकिस्तान जनरल परवेज मुशर्रफ थे कारगिल में जीत के लिए भारत को कैप्टन विक्रम बत्रा यूआईयूटिनेंट मनोज कुमार पांडे मेजर राजेश सिंह अधिकारी और मेजर विवेक गुप्ता के साथ साथ सैकड़ो बहादुर जवान को कोना पड़ा युद्ध के बाद कैप्टन विक्रम बत्रा लुटिनेंट मनोज कुमार पांडे मेजर राजेश सिंह अधिकारी मेजर विवेक गुप्ता राइफलमैन
संजय कुमार और ग्रेनेडियर योगेंद्र यादव को हाईएस्ट गैलंट्री अवार्ड परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया आज भले ही यह जवान हमारे साथ नहीं है लेकिन कारगिल की ऊंची चोटिया आज भी इनके बहादुर के किस सुनती शान से भारत के बॉर्डर की रखवाली करती
Disclaimer:
यह लेख विभिन्न ऐतिहासिक स्रोतों, पुस्तकों और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। लेख का उद्देश्य किसी देश, समुदाय या व्यक्ति की भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं, बल्कि ऐतिहासिक घटनाओं को जानकारी और सम्मान के साथ प्रस्तुत करना है।