Hitler कैसे बना दुनिया का सबसे क्रूर तानाशाह? | Adolf Hitler Life Story After World War 2”

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(Hitler) 11 साल का एक जर्मन बच्चा हेलमेट सोने के लिए बेड पर जाता है पर अचानक वो अपने पेरेंट्स को सीरियस टोन में कुछ बातें करते सुनता है बच्चे के फादर अपनी वाइफ से कहते हैं की लगता है अब समय ए गया है की हम पूरे परिवार को खत्म कर दे यह केवल महसूस ऐड कर लो बच्चे के फादर की आवाज़ में एक दर होता है और इस दर को बयान करते हुए वो ए गया अपनी वाइफ से कहता है की अबला हमारे साथ वही करेंगे जो हमने जूस के साथ किया अब हेलमेट उसे समय इस बात को सुनकर कुछ रिएक्ट नहीं करता और सो जाता है अगले दिन उसे बच्चे के फादर पुरी फैमिली के साथ जंगल में जाते हैं और पिकनिक मानते

हैं लेकिन इसके बाद हेलमेट के फादर खुद को अपने ऑफिस में गोली मार लेते हैं जिसके बाद हेलमेट उनकी यूनिफॉर्म को फैमिली फायर प्लेस पर चलता देखता है इस इंसीडेंट के बाद हेलमेट को वही रात वाली बात याद आती है और वो इतना ज्यादा दर जाता है की वो अगले 9 साल तक अपने घर पर खाना भी नहीं खाता केवल इस से की कहीं उसकी मान से खाने में जहर ना दे अभी हमने आपको जो स्टोरी सुनाई वो केवल एक स्टोरी नहीं बल्कि वर्ल्ड वॉर 2 के खत्म होने के बाद लोगों की मेंटालिटी थी स्टोरी में हेलमेट एक रैंडम जर्मन बॉय था जिसके फादर हिटलर के सपोर्टर द जो की वर्ल्ड वॉर तू हारने के

बाद डरे हुए द ये दर उसे समय केवल उनके अंदर नहीं था बल्कि हिटलर के हर सपोर्टर के अंदर था जिन्होंने हिटलर के कारण युद्ध लड़ा वह हरे और दर के जिए यह हेल्पर के फादर की तरह मारे गए हिटलर ना केवल उनकी मौत का कारण बल्कि करोड़ लोगों की मौत का कारण रहा है इसने इतिहास के सबसे बड़े jinocytes करवाए हैं इसने ऐसे कम्स बनवा जहां बच्चे बड़े और बुढो को गैस चैंबर में डालकर मार दिया जाता था हिटलर ने दुनिया में अपनी ऐसी तानाशाही दिखाई थी की आज भी लोग किसी सख्त इंसान को हिटलर से कंपेयर करते हैं लेकिन हमारे मानने में शायद ही इस दुनिया में कोई होगा जिसे हम हिटलर से

कंपेयर कर सके क्योंकि इसने जो क्राइम किए वो मानवता को शर्मसा

र करने वाले कम द हिटलर के समय में जो सिचुएशंस द वो हम केवल पढ़ सकते हैं लेकिन महसूस ना कभी कर सकते हैं और ना कभी करना चाहेंगे लेकिन कहते है हर कहानी के दो पहलू होते हैं वैसे ही हिटलर के भी दो पहलू द लोग इसे दो तरह से देखते हैं अब कुछ के लिए यह एक कुर्ता आना चाहता तो कुछ के लिए ये ग्रेट लीडर भी था हिटलर एक ऐसा लीडर था जो केवल अपनी स्पीच इसके थ्रू ही लोगों के अंदर एक आंख पैदा कर देता था वो लोगों को इन्फ्लुएंस और मनप्रीत करने में काफी माहिर था लेकिन ऐसा नहीं की यह बचपन से
ऐसा था बल्कि हिटलर तो

बचपन में एक आर्टिस्ट बन्ना चाहता था प्लीज बन्ना चाहता था तो आखिर ऐसा क्या हुआ जिसने हिटलर को एक प्रीस्ट और आर्टिस्ट बनने की जगह एक क्रूर तानाशाह बना दिया [संगीत] बॉर्डर से लगी हुई है हिटलर ने एलॉय हिटलर और क्लेरा पॉजिल के घर जन्म लिया जिन्होंने इसका नाम एडोल्फ हिटलर रखा ये अपने परिवार का चौथा बच्चा था हिटलर को अपने परिवार में बड़ी ही प्यार से रखा जाता था स्पेशली हिटलर की मैन इस पर अपनी जान देती थी क्योंकि हिटलर से पहले उनके जो भी बच्चे हुए द वो किसी ना किसी वजह से ज्यादा दिन जी नहीं सके इसका पढ़ में

ज्यादा मैन नहीं लगता था उसे स्कूल की पढ़ और डिसिप्लिन लाइफ फिजूल की बातें लगती थी जिसके कारण हिटलर और उसके फादर के बीच कभी नहीं बना इविल हिटलर के फादर कभी-कभी तो गुस्से में उसे मारते पीटते भी द जिससे परेशान होकर हिटलर ने 8 साल की उम्र में सिंगिंग लोशन लेना शुरू कर दिए जिससे वह चर्च में गाना गाने लगा चर्च में जाने के कारण ही वो एक समय पर प्रीस्ट भी बन्ना चाहता था लेकिन ऐसा हो नहीं पाया क्योंकि इसी समय हिटलर की लाइफ में एक टर्निंग पॉइंट आता है वो अपने छोटे भाई एडमिन को खो देता है एडमिन की पर खतरा रोग भी कहते हैं उसकी वजह से डेथ

हो गई जिसका हिटलर के ऊपर काफी बुरा असर पड़ा वो अपने भाई को हमेशा याद करता रहता वो धीरे-धीरे एक ऐसा लड़का बन जाता है जो केवल अपने में ही रहना पसंद करता है एवं इस इंसीडेंट के बाद वो अपने फादर और टीचर्स के साथ भी काफी बुरा बर्ताव करता है उसने स्कूल्स में भी काफी गंदा परफॉर्म करना शुरू कर दिया था हालांकि समय के साथ हिटलर का इंटरेस्ट भी चेंज हुआ और अब वो एक आर्टिस्ट बन्ना चाहता था जिसके लिए उसने दो बार आर्ट स्कूल में अप्लाई भी किया था लेकिन दोनों बार उसे वहां से रिजेक्शन मिला इसी समय हिटलर एक ऐसा इंसान बनता जा रहा था जिसका इंटरेस्ट जर्मन
हिस्ट्री और जर्मन पीपल में था वो बेशक ऑस्ट्रिया में पैदा हुआ था लेकिन उसका मैन जर्मनी की ओर ही भगत था हिटलर

बचपन से ही जर्मनी का नेशनल सॉन्ग गाता वहां के बारे में पढ़ता वहां के लोगों से इन्फ्लुएंस होता हिटलर के भाई की मौत के 3 साल बाद उसके फादर की भी डेथ हो जाती है जिसके बाद हिटलर को की पुर अकादमी परफॉर्मेंस की वजह से स्कूल से भी निकल दिया जाता है हिटलर के पास अब अपने कोई फ्यूचर प्लांस नहीं द उसके घर का खर्च भी और फींस बेनिफिट्स से चलता और ऊपर से हिटलर के मैन की तबीयत भी खराब रहने लगी थी हिटलर इन सभी चीजों से

काफी परेशान था की अचानक एक दिन उसकी मैन की भी डेथ हो जाती है 21 दिसंबर 1960 को हिटलर अपनी मैन को भी खो देता है जिसके बाद वो पुरी तरह से अकेला और अनाथ हो जाता है उसके पास ना रहने को घर था ना खाने को खाना वो दर-दर कम की तलाश में भट्ट और रोता उसके पास खाने या रहने को एक फूटी कौड़ी भी नहीं थी जिसकी वजह से हिटलर ने लेबर का कम भी किया पेंटिंग्स बनाए और उन्हें बेचा कुल मिलाकर जीने खाने के लिए जो किया जा सकता था हिटलर ने वो सब किया इस तरह से हिटलर एक नॉर्मल लाइफ स्पेंड करने लगा इसी समय हिटलर का सामना मेयर का प्रति लगाव के लिए जाने जाते द

नहीं हिटलर इस समय मारिया हिल डिस्ट्रिक्ट में रहा करता था जहां जर्मन नेशनलिज्म हर दूसरे इंसान में देखने को मिलता था जिसके कारण हिटलर को जर्मनी और पॉलिटिक्स दोनों में काफी इंटरेस्ट आने लगा वो मेयर का लगर से भी काफी प्रभावित था जिसके कारण वो ज्यादा से ज्यादा न्यूजपेपर्स पढ़ता और हर पॉलिटिकल न्यूज़ से अपडेट रहने लगा उसके मैन में जूस के लिए इस समय तक कोई नफरत नहीं थी हिटलर वर्ल्ड वॉर वैन से पहले तक जूस के साथ अपने पेंटिंग बिजनेस में डीलिंग भी करता था लेकिन उसके माइंड पर फर्स्ट वर्ल्ड वॉर ने काफी बुरा असर डाला हिटलर ने फर्स्ट वर्ल्ड वॉर के बारे में

जैसे ही सुना वो जर्मनी शिफ्ट हो गया और उसने आर्मी में जाने का फैसला लिया हिटलर ने फर्स्ट वर्ल्ड वॉर में एस अन सोल्जर पार्टिसिपेट किया जहां पहले वो केवल इनफॉरमेशन पहुंचने का कम करता था लेकिन देखते ही देखते वो जर्मन फोर्सेस में वो एक पॉप्युलर फेस बन गया उसने कई जंग भी लड़े जिसमें फोर्स बैटल ऑफ डी बैटल ऑफ सरसों में डी बॉटल ऑफ अरस एंड डी बैटल ऑफ पैशन डिले आती है इन सभी लड़ाइयां में से बैटल ऑफ डी शो में हिटलर घायल हो गया था लेकिन फिर भी उसने हर नहीं मणि जिसके कारण उसकी ब्रेवरी को सैल्यूट किया गया और उसे आयरन क्रॉस से सम्मानित किया गया हालांकि

वॉर के बाद हिटलर लंबे समय तक हॉस्पिटल में एडमिट रहा हिटलर को काफी मेजर injurys आई थी वॉर के एंड तक हिटलर के अंदर जर्मन नेशनलिज्म साफ तौर पर देखी जा सकती थी जर्मनी का वॉर को हारने का दुख हिटलर को लिए बैठा हिटलर ने मैन ही मैन सिविलियन लीडर्स जूस मार्क्स इसके लिए नफरत का ली थी हिटलर का मानना था की इन लोगों ने वॉर के दौरान उनके पीठ में छुरा घोपा है इन लोगों ने वॉर को खत्म किया और ऐसी truties पर साइन किया जिन्होंने जर्मनी को हमेशा हमेशा के लिए बर्बाद कर दिया हिटलर ने यही से अपने मैन में एक आईडियोलॉजी को जन्म दिया

1914 से लेकर 1918 तक वर्ल्ड वॉर वैन लड़ा गया जिसमें एलॉयज कंट्रीज यानी इंग्लैंड फ्रांस एंड रूस ने सेंट्रल कंट्रीज को हरा दिया जिसमें जर्मनी भी आता था जर्मनी के हारने के बाद वहां का पॉलिटिकल सिस्टम काफी खराब हो गया था कोई भी सरकार वहां राज करने के लिए नहीं थी जिसके कारण सभी पार्लियामेंट पार्टी को जर्मनी में अपनी गवर्नमेंट बनाने का मौका मिल गया जिसके लिए एक नई गवर्नमेंट को बनाने की बात सामने आने लगे नई गवर्नमेंट को फॉर्म करने के लिए नेशनल असेंबली ने वाइमर नाम की जगह पर मिलने का फैसला लिया जहां बाद में कॉन्स्टिट्यूशन को फॉर्म करते हुए एक

गवर्नमेंट को बनाया गया जिसके लिए प्रॉपर वोटिंग्स का सहारा लिया गया जिसमें वुमेन ने भी अपने वोट डेल इस गवर्नमेंट को ही विमा रिपब्लिक के नाम से जाना जाने लगा हालांकि उसे समय ज्यादातर जर्मनी की पब्लिक इस रिपब्लिक के खिलाफ पर साइन किया जिसने जर्मनी को बर्बाद कर दिया एंट्री एंट्री फीस में सबसे हर्ष और हमिलिएटिंग ट्रीटी ट्रीटी ऑफ़ वर्सेज थी ट्रीटी ऑफ़ वर्साय में इतने होश रूल्स और एक्शंस द जिसकी वजह से जर्मनी को बहुत बुरे इकोनॉमिक्स से गुजरना पड़ा इस पीस ट्रीटी के कारण ही जर्मनी ने अपनी ओवरसीज़ कॉलोनी 10th ऑफ पापुलेशन 13% टेरिटरीज

75% आयरन और 26% गोल खो दिए एलीट पावर्स ने वॉर के बाद जर्मनी पर ऐसे रूल्स इंपोज किए जिससे उनकी कमर ही टूट गई जर्मनी स्ट्रीट के कारण दिन पर दिन एक वीक देश बनता चला गया जर्मनी के जो भी रिसोर्सेस द वो सभी रिसोर्सेस कंट्रीज ने छीन लिए जिसके कारण जर्मनी के पास आगे बढ़ाने के लिए ना पैसे द ना कोई रिसोर्सेस का सारा खर्चा भी थोक दिया और इसे करीब 6.

6 बिलियन पाउंड्स देने के लिए मजबूर अब आप अंदाजा लगा लीजिए की उसे समय में 6.6 बिलियन पाउंड्स कितना ज्यादा अमाउंट होगा इसके अलावा जर्मनी को अपनी आर्मी पर भी कंट्रोल लगाना पड़ा कई लोग जर्मनी के खराब हालत का जिम्मेदार वाइमर रिपब्लिक और इनके द्वारा साइन की गई ट्वीटी ऑफर सेल को भी मानते हैं इंक्लूडिंग हिटलर अब विमा रिपब्लिक का दिन पर दिन विरोध होने लगा कंज्यूम लिस्ट मिल कर सोशलिस्ट कैथोलिक और डेमोक्रेट्स पर अटैक करने लगे क्योंकि ये लोग विमा रिपब्लिक को सपोर्ट करते द इस समय नेशनल ग्रुप ने wimari पब्लिक के लीडर्स और सपोर्टर्स को नवंबर क्रिमिनल्स का नाम

दिया नेशनल लिस्ट के अकॉर्डिंग ये सभी लोग जर्मनी के क्रिमिनल्स द जिन्होंने नेगोशिएट करके [संगीत] साइन किया नेशनल स्किल्स माइंड सेट ने जर्मनी के पॉलिटिकल डेवलपमेंट में कई चेंज देखे हिटलर के माइंड सेट पर वर्ल्ड वॉर वैन के रिजल्ट ने भी काफी भारी असर डाला और खत्म होने के बाद जर्मनी की आर्थिक स्थिति तो खराब थी लेकिन लेकिन इसका असर लोगों की सोच पर भी पड़ा पॉलीटिशियंस और न्यूज़पेपर पब्लिशर्स ने मर्दों की एक अलग छवि प्लांट करने की कोशिश की उनके अकॉर्डिंग आदमी को एग्रेसिव स्ट्रांग और मैस्क्युलिन होना जरूरी था वही वुमेन को

केवल घर के कामकाज पर ध्यान देना जरूरी था इसके अलावा ट्रेंच लाइफ को भी ग्लोरिफाइड किया गया दरअसल वॉर के दौरान सोल्जर्स बड़े-बड़े गड्ढे बनाकर उनमें रहते द जहां की असलियत मीडिया में दिखाई जाने वाली लाइफ से एकदम अलग थी असल में सोल्जर्स को इन सभी गधों में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था इन ट्रेंचेज में उन्हें हार्मफुल गैसेस रैक्स एनिमी सेलिंग और गंदगी में रहना होता था इसके अलावा उसे समय और नेशनल ओनर का दौर भी देखा गया जिसने पब्लिक को डिक्टेटरशिप की ओर धकेल दिया माइंड सेट के अलावा पॉलिटिकल चेंज भी देखे गए वैसे विमा रिपब्लिक के खिलाफ ग्रुप
फॉर्म्स होने लगे जिसमें स्पॉट एक ऐसा रिवॉल्यूशनरी ग्रुप था जो इंडिया के बोल्शेविक रिवॉल्यूशन से काफी इन्फ्लुएंस था लोग सोवियत स्टाइल गवर्नेंस अपने देश में भी चाहते द जिसके लिए दिन पर दिन प्रोटेस्ट होने शुरू हो गए अब विमा रिपब्लिक ने इन सभी प्रोटेस्ट को शांत करने के लिए एक मीटिंग की जिसके बाद उन्होंने फ्री कॉप्स का सहारा लिया फ्री कॉप्स वॉर

वेजिटेरियन और jobnis लोगों का वो ग्रुप था जो गवर्नमेंट के लिए कम करता था लेकिन इनसे भी protispar ज्यादा फर्क नहीं पड़ा एवं कुछ समय बाद सिस्ट ग्रुप ने कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ जर्मनी बनाई जिसने

लगातार विमा रिपब्लिक का विरोध किया जर्मनी की हालत काफी खस्ता होती नजर ए रही थी लोगों के पास खाने तक के पैसे नहीं द पर उन्हें अपनी वॉर की भरपाई भी करनी थी जर्मनी के गोल्ड रिज़र्व ने खाली कर दिए द जिस कारण उन्होंने पैसा देने से माना कर दिया जिसके बाद फ्रांस ने जर्मनी का लीडिंग इंडस्ट्रियल एरिया रोड पर कब्जा कर लिया रोड में दुनिया का सबसे ज्यादा कॉल पाया जाता है इसके बाद जर्मनी अपने बुरी सिचुएशन को ठीक करने के लिए पैसा छापना शुरू कर दिया पैसे छापने की वजह से देश में नोट तो भर गए लेकिन इनकी वैल्यू गिर गई अब एक मुट्ठी

नोट से एक ब्रेड खरीद पाना भी मुश्किल होने लगा महंगाई इतनी बढ़ गई की वहां एक नए शब्द का जन्म हुआ जिसका नाम था हाइपर इन्फ्लेशन जिसका मतलब होता है की महंगाई का हद पार कर जाना इस वक्त अमेरिका ने जर्मनी की तरफ मदद का हाथ बढ़ाया लेकिन फिर अमेरिका में आए भयानक ग्रेट डिप्रेशन की वजह से अब अमेरिका भी पीछे है गया डी ग्रेट डिप्रेशन के बाद अमेरिका ने जर्मनी को सपोर्ट देना भी बंद कर दिया जिससे जर्मनी को एक साथ दो झटका लगे एक उस के फाइनेंशियल दूसरा दुनिया भर में इकोनॉमिक्स के आने से जर्मनी की हालत और बिगड़ी चली गई 1932 तक इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन 40% तक कम

हो गया जिससे करीब 6 मिलियन लोग उसे समय जर्मनी में अनइंप्लॉयड घूम रहे द लोगों ने सड़क पर नारे लगाने शुरू कर दिए जर्मनी की हालत इतनी खराब हो गई थी की लोगों का सरकार से विश्वास भी डगमगाने लगा था लोग सरकार के खिलाफ नारे लगाने लगे सरकार की खस्ता हालत देख हिटलर ने इस मौके का फायदा उठाया हिटलर इस समय सत्ता में आया यहां से हिटलर और ना जिस्म ने जर्मनी में अपनी अलग पहचान बनाई और यही से शुरू हुई हिटलर का नो वैन से जर्मनी का एडोल्फ हिटलर डिक्टेटर बनने का सफर आर्मी छोड़ने के बाद हिटलर ने 1919 में जर्मनी विर्क पार्टी ज्वाइन की ये ग्रुप उसे समय इतना बड़ा

नहीं था जिस कारण हिटलर उसे ग्रुप में बहुत जल्द शामिल हुआ और अपनी पापुलैरिटी बढ़ा ली हिटलर ने इन सारे ग्रुप मेंबर्स को इकट्ठा किया और उनका सपोर्ट प्राप्त कर लिया और इस ग्रुप का नाम बदलकर नेशनल सोशलिस्ट जर्मन वर्कर्स पार्टी कर दिया [संगीत] इसके अकॉर्डिंग लोगों को उनके रेस और अपीरियंस से जज किया जाता था लोगों को अपार क्लास और लोअर क्लास के हिसाब से ट्रीट किया जाता था हिटलर जर्मनी पर राज करने के सपने के साथ निकल पड़ा इसने अपनी पार्टी को धीरे-धीरे बड़ा किया जिसके बाद इसने 1923 में बावरिया नाम की जगह को सीज करने का प्लान बनाया लेकिन उसमें ये बुरी

तरह से फैल हो गया जिसके बाद इसे अरेस्ट कर लिया गया जहां जेल में ही बैठे बैठे ही हिटलर ने एक बुक लिख दी जिसमें उसने अपने फ्यूचर प्लांस और अपनी आईडियोलॉजी को साफ तौर पर बयान किया इस बुक का नाम माइन कम था जिसका मतलब माय स्ट्रगल होता है हालांकि ये बुक लोगों में फेमस नहीं हो साकी हिटलर कुछ सालों बाद जेल से बाहर आया और दोबारा अपनी पार्टी पर कम करने लगा हिटलर ने 1930 तक अपनी पार्टी को बड़ा करने के लिए गजब की मेहनत की और 1930 में हिटलर ने ग्रेट डिप्रेशन का फायदा उठाया और लोगों का सपोर्ट हासिल किया इकोनॉमिक्स लोड डाउन के चलते जहां लोग पुरी तरह से

अपना होप हो चुके द वह हिटलर ने लोगों से एक बटोर फ्यूचर का वादा किया और अपना नाज़ी प्रोपेगेंडा चलाया हिटलर ने अपनी इनफ्लुएंशल स्पीच के थ्रू लोगों को ये विश्वास दिलाया की अगर वो उसे वोट देंगे तो वो हर साल में उन्हें खराब सिचुएशन से बाहर निकलेगा इस दौरान हिटलर बड़ी-बड़ी रैली करता अपनी स्पीच इस देता लोग इसकी बातों से इन्फ्लुएंस हो जाते जिस कारण इसने बहुत कम समय में पूरे जर्मनी में अपना जादू चलाया जिसका असर वोटिंग्स में देखने को मिला 1928 में हिटलर ने पहली बार चुनाव लड़ा था जहां उसे केवल 2.

6% वोट मिले द लेकिन इस बार यानी 1932 में हिटलर को किसी भी दूसरी पार्टी से ज्यादा वोट्स मिले कई रिपोर्ट से दवा करती है की हिटलर को 1932 के इलेक्शंस में लगभग 38 मिलियन वोट्स मिले द इसके बाद हिटलर ने अपना असली रंग दिखाना शुरू कर दिया दरअसल हिटलर इस बात को साफ तौर पर जानता था की जर्मन कॉन्स्टिट्यूशन में इमरजेंसी और डाइमेंशन ऑफ सिविल राइट्स के प्रोविजंस है बस इन्हें लागू करने के लिए इसे एक सही समय का वेट था जिसके लिए इशांत बैठा था हिटलर कितनी पापुलैरिटी देखकर 30 जनवरी 1933 को प्रेसिडेंट hiddenberg ने हिटलर को जर्मनी का चांसलर बना दिया 28 फरवरी 1933 को

जर्मन पार्लियामेंट में एक मिस्टीरियस आग लग गई हिटलर ने सेशन का फायदा उठाया और पूरे जर्मनी में इमरजेंसी लगा दी जिसमें सिविलियन से उनके सभी राइट्स को छीन लिया गया इमरजेंसी के बाद हिटलर इनेबलिंग एक्ट लेकर आया जिसके पास होने के बाद जर्मनी एक डिक्टेटर कंट्री बन गया इस एक्ट ने हिटलर को जर्मनी की सारी पावर सौंप दी जिसके बाद देश में जितनी भी पॉलिटिकल पार्टी और यूनियंस द उन्हें बनकर दिया गया हिटलर ने कंट्री के इकोनॉमी मीडिया आर्मी को पुरी तरह अपने कंट्रोल में कर लिया जिसके बाद जर्मनी में हिटलर का नियम ही शासन बन गया

हिटलर ने स्पेशल survilians और सिक्योरिटी फोर्सेस का भी इंतजाम किया जो उसके खिलाफ साजिश करने वाले लोगों को पकड़ने का कम करते द अब हिटलर के पास जर्मनी की सत्ता तो थी लेकिन उसे ऑपरेट करने के लिए पैसा नहीं था जिसके लिए हिटलर ने जर्मनी को एक नई शॉप देना शुरू कर दिया हिटलर ने सबसे पहले हॉलमार्क शॉट नाम के एक नॉमिस को हीरे किया जिससे जर्मनी की हालत सुधार सके हुआ भी ऐसा ही हॉलमार्क के प्लांस ने जर्मनी की हालत को सुधार जिसके लिए सबसे पहले वो फुल प्रोडक्शन अनफॉल एंप्लॉयमेंट के एक के साथ आगे बढ़ाने लगा इसके अलावा हिटलर के राज में फॉरेन पॉलिसी में भी

Hitler: कुछ के लिए राक्षस, कुछ के लिए महान नेता

सुधार देखने को मिला हिटलर ने सबसे पहले 1933 में खुद को लीग ऑफ नेशन से बाहर किया फिर 1938 में की जगह को वापस अपने कब्जे में किया साथियों ऑस्ट्रिया और जर्मनी को दोबारा एक किया इसके बाद हिटलर ने वेस्टर्न जर्मनी की ओर अपना रुख मोड और चेक पर कब्जा कर लिया हिटलर के इन सभी एक्ट्स में इंग्लैंड ने बिना उसका सपोर्ट किया वो इसलिए क्योंकि इंग्लैंड को लगता था की वर्षाली ने जर्मनी के साथ काफी बुरा किया था कुल मिलाकर कुछ सालों में हिटलर ने जर्मनी की किस्मत चमक दी थी लेकिन वो यहां रुका नहीं उसमें और ज्यादा हासिल करने की चाह थी हालांकि शार्क ने हिटलर को
समझाया भी था की स्टेट में अभी फाइनेंशियल कंडीशन पुरी तरह से ठीक नहीं है तो वो जो करें सोच समझ के करें लेकिन हिटलर कहां किसकी सुनने वाला था हिटलर इस इंसीडेंट के बाद सबसे पहले तो शॉट को बाहर करता है और फिर इसने अपने इकोनॉमिक्स को ठीक करने के लिए वॉर का डिसीजन लिया क्योंकि उसके अकॉर्डिंग अगर जर्मनी ज्यादा से ज्यादा टेरिटरी को एक्वायर करेगा तो ज्यादा से ज्यादा रिसोर्सेस उनके अंडर आएंगे जिससे उनकी फाइनेंशियल कंडीशन सुधार सकेगी सितंबर 1939 में हिटलर पोलैंड पर हमला बोल देता है जिसके बाद फ्रांस और इंग्लैंड भी वॉर में शामिल हो जाते हैं वो इसलिए

क्योंकि जिस तरह वर्ल्ड वॉर वैन में ब्रिटेन बेल्जियम का साथ देने का वादा करता है उसी तरह ब्रिटेन ने पोलैंड के साथ भी एक कृति साइन की होती है जिसके अकॉर्डिंग ब्रिटेन को पोलन का साथ देना होता है वही दूसरी ओर जर्मनी ने इटली और जापान के साथ एक ट्रिप साइन किया होता है जिससे वो अपनी इंटरनेशनल लेवल पर पावर बढ़ा सकें देखा जाए तो 1940 तक वर्ल्ड वॉर 2 में जर्मनी के हालत अच्छे द लेकिन अपनी पावर के नशे में हिटलर यहां एक गलती कर देता है जिसके कारण जर्मनी वॉर हर जाता है दरअसल जैसे हिटलर को दिखता है की वो वॉर जीत रहा है वो लगे हाथ अपने सालों से देख

रहे सपने को भी सच करना चाहता है जिसके अकॉर्डिंग हिटलर ईस्टर्न यूरोप पर कब्जा करना चाहता है इस सपने को पूरा करने के लिए हिटलर 1941 में सोवियत यूनियन पर वॉर डिक्लेयर कर देता है जिसके बाद हिटलर वेस्ट में ब्रिटेन और ईस्ट में सोवियत यूनियन को एक साथ संभालने में नाकामयाब हो जाता है और जर्मन आर्मी को ही बर्लिन तक के देती है जिससे सोवियत यूनियन का भी दुनिया में एक बिना दौर देखने को मिलता है अमेरिका अब तक वॉर से बाहर रहता है लेकिन जापान पैसिफिक ओशन में अमेरिका के पोल हार्बर पर अटैक के कारण अमेरिका भी वॉर का हिस्सा बन जाता है यह वॉर लंबी चलती है

हिटलर को दिख रहा होता है की अब उसका वॉर पर से कंट्रोल छूट रहा है लेकिन वो वॉर एंड होने तक बर्लिन में ही रहने का फैसला लेता है और इसी जगह हिटलर रहस्यमई तरीके से खुद को और अपनी वाइफ को गोली मार देता है खुद को शूट करने से पहले हिटलर अपने ऐसे फिजिशियन बर्नर हाथ से पूछता है की सुसाइड करने का सबसे अच्छा तरीका क्या है तो वो हिटलर को पिस्तौल और प्वाइजन के बारे में बताता है जिसके बाद हिटलर खुद को गण से शूट करता है और दुनिया के सबसे खतरनाक तानाशाह का अंत हो जाता है अपने पूरे टाइम पीरियड में नजिस मॉडलिंग के दोषी पाए जाते हैं ना जिस्म के अकॉर्डिंग

कोई लोअर क्लास मेंटालिटी एक्सिस्ट करती है लोगों कॉर्पोरेशन तरह से ट्रीट करना चाहिए केवल वो लोग सोसाइटी के टॉप लोगों में आते हैं जो ब्लॉन्ड ब्लू वाइड और नतीस जर्मन आर्यांस की कैटिगरी में आते हैं बाकी जूस को ना जिस्म के अकॉर्डिंग सोसाइटी का सबसे लोअर क्लास माना गया था इन्हें नाजी लोगों का दुश्मन कंसीडर किया जाता था कुल मिलाकर लोगों को उनके फिजिकल अपीरियंस के अकॉर्डिंग ट्रीट किया जाता था नजिस केवल पूरे एंड हेल्दी नॉटी आर्यांस को सोसाइटी में प्रेफरेंस देते द हिटलर के राज में स्पेशली जस पर ज्यादा अत्याचार किया गया

नरसी जूस को अपना दुश्मन मानते द यह दुश्मनी सालों पुरानी [संगीत] भेदभाव किया जाता था किन जूस से नफरत का सबसे बड़ा प्रेसिडेंट कारण था जर्मनी का वर्ल्ड वॉर वैन में हर जाना हिटलर का मानना था की इन्हीं लोगों ने फाइनेंशियल ईयर लाइफ की मदद की है जिसकी वजह से उन्हें हर का मुंह देखना पड़ा हिटलर ने जूस को हमेशा ही इंटरनल कंप्यूटर की तरह इन्हें रहने के लिए भी एक सेपरेट एरिया प्रोवाइड किया गया टॉस के नाम से जानते द हिटलर इन्हें रेस के अकॉर्डिंग डिफाइन करता था जिस वजह से उसका मानना था की इनका कन्वर्जन करने से भी कोई फायदा नहीं होगा बल्कि फाइनल

एलिमिनेशन ही इनका सॉल्यूशन है और इस फाइनल एलिमेंट्स का मतलब था मौत हिटलर का मानना था की देश के युद्ध का पॉलिटिक्स में एक्टिव होना जरूरी है उसका मानना था की एक स्ट्रांग नाज़ी सोसाइटी केवल देश के यंगस्टर्स को नजिस्म पढ़कर ही बनाई जा सकती है हिटलर ने स्कूल्स में भी बच्चों को जूजू से नफरत करना सिखाया उसने सबसे पहले सभी जूस टीचर्स को स्कूल से निकल दिया उसके बाद सभी नैंसी बच्चों को जूस के साथ बैठना अलाउड नहीं था बच्चों को भेदभाव सिखाया जाने लगा हिटलर ने फिजिकल हैंडीकैप बच्चों को स्कूल से बाहर कर दिया और बाद में उन्हें गैस चैंबर में दल दिया गया
केवल गुड जर्मन को ही स्कूल का अधिकार था एवं नजिस्म को बच्चों की टेक्सबुक में इंट्रोड्यूस किया गया और उन्हें सिखाया जाने लगा की उन्हें लॉयल और सबमिसिव बन्ना चाहिए साथ ही जूस से नफरत करनी चाहिए और हिटलर की वरशिप करनी चाहिए हिटलर के समय बच्चों को ये समझाया जाता था की वुमेन में से डिफरेंट है और इक्वलिटी जैसी कोई चीज एक्जिस्ट नहीं करती अगर वुमेन में जैसी बन जाएंगी तो सोसाइटी बर्बाद हो जाएगी लड़कों को बताया जाता था की उन्हें एग्रेसिव और मैं इसके लिए बन्ना है और वुमेन से एक्सपेक्ट किया जाता था की वो एक अच्छी मैन बने और पूरे ब्लड आर्यांस को जन्म दे

इसके साथ ही वुमेन को अपनी प्योरिटी को भी मेंटेन करना होता था उन्हें जूस से दूरी बनाए रखने को कहा जाता था एवं अगर किसी औरत ने अनडिजायरेबल लस्सी को जन्म दिया तो उसे पनिश किया जाता था और डिजायरेबल लगी को जन्म देने पर उन्हें अवार्ड दिया जाता था कुछ इस तरह के शिक्षा के साथ जर्मनी नर्सिंग फैलाया जा रहा था हालांकि हिटलर के मरने के बाद जर्मनी ने ही बल्कि पुरी दुनिया ने यह बात समझे की वॉर सिर्फ नफरत ला सकता है और डिस्ट्रक्शन फैला सकता है इसी वॉर के खत्म होने के बाद यूनाइटेड नेशंस जैसे ऑर्गेनाइजेशंस बने हमें उम्मीद है की आपको हमारे वीडियो पसंद आया होगा तो
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