
1971 India Pakistan War
3 दिसंबर 1971 पाकिस्तान ऑपरेशन चंगेज खान लॉन्च करता है इंडिया की कई एयरफील्ड्स पर बम गिराए जाते हैं पाकिस्तानी एयरफोर्स के द्वारा अमृतसर पठानकोट जोधपुर अंबाला आगरा श्रीनगर टोटल में 11 एयर फील्ड्स पर हमला किया जाता है उस शाम को प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी रेडियो पर एक मैसेज जारी करती हैं देश की जनता के लिए यह कहती हैं कि इंडिया के खिलाफ एक जंग छेड़ दी गई है मैं एक खतरे के समय बोल रही हूं कुछ घंटे पहले रे दिसंबर पाकिस्तान ने हमारे ऊपर एक हमला किया इंडियन एयरफोर्स रिटल करती है और कुछ इस तरीके से शुरुआत होती है दोस्तों
इंडिया पाकिस्तान 1971 वॉर की एक ऐसी वॉर जिसके अंत में एक नए देश का जन्म होता है बांग्लादेश हमा देश देश बांगलादेश बांगलादेश लेकिन क्या कारण था आखिर क्यों हुई ये वॉर क्यों बांग्लादेश आजादी चाहता था पाकिस्तान से और इंडिया का क्या रोल आता है इस पूरी कहानी में आइए समझने की कोशिश करते हैं आज के इस वीडियो में इंडिया गव पीपल ऑफ बांगलादेश देर इंडिपेंडेंस संग्राम मुक्ति संग्राम संग्राम स्न संग्राम पाकिस्तान लस्ट हाफ ऑ इट्स कंट्री अ न्यू नेशन वा बोन बांगलादेश कहानी की शुरुआत करते हैं ब्रिटिश के पहले से कॉलोनियल टाइम से पहले जो इंडियन

सबकॉन्टिनेंट था यानी आज के दिन का इंडिया पाकिस्तान बांग्लादेश नेपाल बर्मा और श्रीलंका इस पूरे एरिया में हजारों छोटे-बड़े ऑटोनोमस किंगडम हुआ करते थे राजा महाराजाओं का रूल था जिनके अपनी लैंग्वेजेस होती थी ट्रेडीशन होता था अपना कल्चर होता था जो बंगाल का एरिया होता था स्पेसिफिकली अगर सिर्फ बंगाल वाले एरिया की बात करें यानी आज के दिन का बांग्लादेश प्लस वेस्ट बंगाल और इसके आसपास का कुछ एरिया इस एरिया को करीब 13 सेंचुरी से मोस्टली मुस्लिम राजाओं के द्वारा रूल किया गया था मोहम्मद बख्तियार खिलजी जो फाउंडर थे खिलजी डायनेस्टी के उन्होंने
1971 India Pakistan War Background of the Indian Subcontinent Before 1947
मुस्लिम रूल को शुरू किया था इस एरिया में अर्ली 13th सेंचुरी से लेकिन इंपॉर्टेंट चीज ये जानने वाली है कि जो भी रूलरसोंग्स होल्डर्स होते थे ट्रेडर्स होते थे म्यूजिशियंस होते थे वो अलग-अलग रिलीजस बैकग्राउंड्स और ट्रेडीशन से आते थे बेसिकली कहा जाए हिंदुइज्म और इस्लाम के बीच में जो को एगिस थी और इंटरमलिल्योलर वो इस एरिया में बहुत देखी गई इसकी वजह से जो कट्टरवाद था एक्सट्रीमिस्म था वह काफी हद तक कंट्रोल में रहा समय में आगे चले तो साल 1757 में ईस्ट इंडिया कंपनी इस एरिया को टेक ओवर कर लेती है जिसको मैंने डिटेल में इस वीडियो में समझाया है जिसके बाद
1947 तक ब्रिटिश रूल रहता है और फिर हमें देखने को मिलता है पार्टीशन इंडिया और पाकिस्तान के बीच एस द न्यू डोमिनियंस ऑफ पाकिस्तान एंड इंडिया टेक ओवर देयर ओन अफेयर्स कैरिंग देर फ्यू पोशन 1 मिलियन पीपल बिकम रिफ्यूजी जीना साल 1940 में ही ऑल इंडिया मुस्लिम लीग के एनुअल सेशन में लाहौर रेजोल्यूशन बनाया जाता है जिसमें डिमांड उठाई जाती है कि मुसलमानों के लिए एक सेपरेट स्टेट बनाई जाए इनका डर यह था कि अगर एक ही देश बना रहेगा तो मुस्लिम्स माइनॉरिटी बन जाएंगे और वो डर में जिएंगे पार्टीशन करते वक्त रिलीजियस लाइंस पर बॉर्डर्स बनाने का मतलब यह था कि जो सोशल
कमर्शियल और कल्चरल संबंध थे लोगों के बीच में उन्हें नजरअंदाज करना पड़ता यानी बड़ी-बड़ी स्टेट्स जहां पर कॉमन एक बोली जाती थी उन्हें भी बांटा गया पार्टीशन की वजह से बस इसलिए क्योंकि धर्म के नाम पर लोगों को डिवाइड करना है इसके दो सबसे बड़े एग्जांपल है पंजाब और बंगाल पंजाब का कुछ हिस्सा पाकिस्तान में गया कुछ हिस्सा इंडिया में रहा और सेम विद बंगाल कुछ हिस्सा इंडिया में कुछ हिस्सा पाकिस्तान में लेकिन बांटने का मतलब यह नहीं था कि इनके कल्चर अलग-अलग हो जाएंगे जो दो हिस्सों को बांटा गया वहां के लोग सेम भाषा में बात करते थे सेम कल्चर और
ट्रेडिशनल करते थे बंगाल में जो मुस्लिम्स पाकिस्तान के फेवर में थे उनकी उम्मीद यह थी कि एक नया मुस्लिम देश बनने से उन्हें एक बेहतर स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग मिलेगा उनकी फाइनेंशियल और सोशल कंडीशन इंप्रूव होगी इनमें से कई ऐसे लोग थे जो इनफीरियर फील करते थे हिंदू लैंडलॉर्ड्स के लिए क्योंकि वो उनके लिए काम किया करते थे वो पाकिस्तान की सरकार की तरफ देख रहे थे अपने फंडामेंटल राइट्स पाने के लिए ओबवियसली जब बंटवारा किया गया पार्टीशन हुआ तो बहुत से परिवार बहुत से लोग डिस्प्लेस हो गए एक भारी माइग्रेशन देखने को मिली जिसमें कई मुस्लिम्स पाकिस्तान की

तरफ माइग्रेट हुए और कई हिंदू पाकिस्तान से इंडिया इसी बीच बहुत से दंगे हुए मॉब वायलेंस हुआ कुछ दो से 20द एक्सोडस कंटिन्यू इस माइग्रेशन में एक ग्रुप ऑफ लोग थे जो बिहार में रह रहे मुस्लिम्स थे अब बिहार ओबवियली क्योंकि बांग्लादेश के ज्यादा करीब है तो बहुत से मुस्लिम्स जो बिहार में रह रहे थे वो ईस्ट पाकिस्तान में माइग्रेट किए इन मुस्लिम बिहारीस को स्पेसिफिकली मेंशन करना जरूरी है क्योंकि आप आगे कहानी में देखें
कि कैसे इन्हें माना जाता था कि बांग्लादेश के खिलाफ है इन्हें एंटी बांग्लादेशी माना जाता था अभी के लिए पार्टीशन पर वापस आए तो बंगाल का जो पार्टीशन हो रहा था वो अपने आप में ही एक बहुत बड़ा इशू था शुरुआत में पूरे बंगाल ने पार्टीशन के खिलाफ वोट किया था अगर इस पार्टीशन का मतलब हो कि बंगाल को पाकिस्तान का हिस्सा बनना पड़े लेकिन इस बंगाल में ही वेस्ट बंगाल का जो रीजन था वहां रहने वाले लोग पार्टीशन चाहते थे और इंडिया को जॉइन करना चाहते थे दूसरी तरफ जो ईस्ट बंगाल वाला रीजन था वो पार्टीशन नहीं चाहते थे लेकिन अगर कोई पार्टीशन हो
तो वह चाहते थे कि वह पाकिस्तान को जॉइन करें तो इवेंचर पार्टीशन हुआ वेस्ट बंगाल इंडिया का हिस्सा बना और ईस्ट बंगाल पाकिस्तान का हिस्सा बना पाकिस्तान के देश को दो हिस्सों में डिवाइड किया गया जिनके बीच सेपरेशन 1500 किमी का था और बीच में इंडियन टेरिटरी थी अब इंटरेस्टिंग चीज ये है कि पाकिस्तान का जो नया देश बना उसमें जो मेजॉरिटी एथनिक ग्रुप था वो एक्चुअली में बंगाली का था आधे से ज्यादा पॉपुलेशन इस नए पाकिस्तान के देश की बंगाली थी जो ईस्ट पाकिस्तान में रह रहे थे बाकी वेस्ट पाकिस्तान में पंजाबीस पखत सिंधीस और बलोच
थे अब इवन दो बंगाली की पॉपुलेशन ज्यादा थी पूरे पाकिस्तान में लेकिन जो पावरफुल पोजीशंस थी जैसे कि ब्यूरोक्रेसी मिलिट्री और पॉलिटिक्स की जो पोजीशंस है वो ज्यादातर वेस्ट पाकिस्तान के लोगों के हाथ में थी स्पेसिफिकली कहा जाए तो मुहाजिर्स और पंजाबी जो लोग थे अब इस बैकग्राउंड इंफॉर्मेशन को ध्यान में रखते हुए 1947 के बाद पाकिस्तान में जो पॉलिटिक्स हुई उसे समझते हैं पाकिस्तान की शुरुआत हुई एज अ पार्लियामेंट्री डेमोक्रेसी ठीक जैसे की हुई थी लेकिन फर्क यह था पाकिस्तान में जो सेंट्रल गवर्नमेंट थी वो बहुत ज्यादा पावरफुल थी पावर एक इंसान के हाथ में बहुत
कंसंट्रेटेड थी जिसकी वजह से पार्लियामेंट्री डेमोक्रेसी सही तरीके से स्ट्रांग एस्टेब्लिश नहीं हो पाई साल 1946 में ब्रिटिश सरकार ने इलेक्शंस ऑर्गेनाइज करवाए थे अन डिवाइडेड इंडिया में इन इलेक्शंस के रिजल्ट्स को देखकर बाद में जब पाकिस्तान और इंडिया का बंटवारा हुआ तो लेजिस्लेटर्स को भी इसी तरीके से डिवाइड किया गया पाकिस्तान में मोहम्मद अली जिन्ना गवर्नर जनरल बने जिनका देहांत आजादी के सिर्फ एक साल बाद हो जाता है 19 48 में उनके गुजर जाने के बाद नजीमुद्दीन गवर्नर जनरल बनते हैं और लियाकत अली खान प्राइम मिनिस्टर बनते हैं करीब 3 साल बाद
अक्टूबर 1951 में लियाकत का ससने कर दिया जाता है और नजमुद्दीन नए प्राइम मिनिस्टर बन जाते हैं वो गुलाम मोहम्मद को गवर्नर जनरल बनाते हैं जो कि एक पंजाबी थे साल 1953 में पहला मिलिट्री क देखने को मिलता है पाकिस्तान में जब गुलाम मोहम्मद पावर टेक ओवर कर लेते हैं और नजीमुद्दीन को डिस्मिस कर देते हैं अगले साल 1954 में इलेक्शंस होती हैं पाकिस्तान में और इन इलेक्शन में ज्यादातर सीटें जीती जाती हैं यूनाइटेड फ्रंट के द्वारा जो कि अपोजिशन पार्टीज की एक कोलेशन थी इनमें से एक सबसे बड़ी पार्टी थी आवामी लीग जो कि एक ईस्ट बंगाल की पार्टी थी इन इलेक्शन रिजल्ट्स
के बाद पूरी कांस्टीट्यूएंट असेंबली को डिस्मिस कर दिया जाता है गुलाम मोहम्मद के द्वारा साल 1955 में गुलाम मोहम्मद ऑफिस छोड़ते हैं और मेजर जनरल इस्कंदर मिर्जा गवर्नर जनरल बनते हैं इनके अंडर पहली बार होता है कि ईस्ट बंगाल की रिनेमिंग करी जाती है ईस्ट बंगाल को अब से ईस्ट पाकिस्तान बुलाया जाने लगता है अब 1947 से लेकर 1971 के बीच में दोस्तों पाकिस्तान में कई फेजस देखने को मिलते हैं जहां पर मिलिट्री का रूल चल रहा था इसका मतलब यह है कि जो पॉलिटिकल पार्टीज डिजर्व करती थी पावर में होना उनसे पावर छीनी जा रही थी स्पेसिफिकली कहा जाए ईस्ट बंगाल में रहने
वाले लोगों को पॉलिटिकली रिप्रेजेंट होने का मौका नहीं मिल पा रहा था इसके अलावा ज्यादातर पैसा जो देश खर्च करता था वो वेस्ट पाकिस्तान के पास जाता था 75 पर नेशनल बजट वेस्ट पाकिस्तान पर स्पेंड किया जाता था इवन दो 62 पर जो रेवेन्यू इनकम आ रहा था सरकार के पास वो ईस्ट पाकिस्तान से आने लग रहा था जो इकोनॉमिक डेवलपमेंट देखने को मिल रही थी वो वेस्ट पाकिस्तान में ज्यादा बेहतर तरीके से देखने को मिल रही थी 1969 70 में जो पर कैपिटा इनकम था वेस्ट पाकिस्तान का 61 पर ज्यादा था ईस्ट पाकिस्तान से 25 गुना ज्यादा मिलिट्री पर्सनल्स थे वेस्ट पाकिस्तान में और इस
सबके अलावा सबसे बड़ा इशू यहां पर था लैंग्वेज को लेकर जिन्ना और उनके कई एडवाइजर्स मानते थे कि ईस्ट पाकिस्तान और वेस्ट पाकिस्तान का सही मायनों में यूनिफिकेशन तभी हो सकता सकता है जब वो एक भाषा बोले और यह भाषा उनकी राय में होनी चाहिए उर्दू तो वेस्ट पाकिस्तान के रूलरसोंग्स ईस्ट पाकिस्तान में रहने वाले जो लोग थे वो ईस्ट बंगाली थे बंगाली भाषा बोलते थे इनफैक्ट 56 पर पाकिस्तानी बंगाली में ही बात करते थे उर्दू को एक लैंग्वेज ऑफ द एलीट माना जाता था जो हाई प्रोफाइल लोग हैं सिर्फ वही उर्दू में बात करते हैं आम जनता बंगाल में रह रही बंगाली में बात
करती थी 21 मार्च 1948 को मोहम्मद अली जिन्ना ने ढाका में एक स्पीच दी थी और बड़े क्लीयरली कहा था पाकिस्तान की स्टेट लैंग्वेज सिर्फ उर्दू होगी और कोई और भाषा नहीं होगी लेट मी मेक इट वेरी क्लियर टू यू ली नो डाउट दटक लैंग्वेज ऑफ पाकिस्तान इज गोइंग टू बी उर्दू एंड नो अदर लैंग्वेज ये सब सुनकर बंगाल में रहने वाले लोग बड़े आउटरेज्ड हो गए इवेंचर दू इंपोजिशन की वजह से शुरुआत हुई बंगाली ल लैंग्वेज मूवमेंट 21 फरवरी 1952 एक बड़ा प्रोटेस्ट ऑर्गेनाइज करवाया जा रहा था इस लैंग्वेज मूवमेंट के द्वारा स्टूडेंट्स का एक बड़ा ग्रुप और पॉलिटिकल एक्टिविस्ट इकट्ठे हुए
प्रोटेस्ट करने के लिए प्रोविंशियल असेंबली के सामने पाकिस्तान की आर्मी ने इन पर ओपन फायर कर दिया पांच लोग मारे गए और आज के दिन तक 21 फरवरी को सेलिब्रेट किया जाता है एज द लैंग्वेज मार्टियस डे बांग्लादेश में सल 1999 में बाद में जाकर यूनेस्को ने कहा था कि 21 फरवरी अब से इंटरनेशनल मदर टंग डे भी मनाया जाएगा इसके रिस्पांस में 2 साल बाद जाकर 1954 में बंगोली को फाइनली कहा गया कि एक ऑफिशियल स्टेटस दे देते हैं 1956 में बंगाली को एक स्टेट लैंग्वेज भी बना दिया गया लेकिन लोगों के अंदर जो फीलिंग थी बंगाली कल्चर और लैंग्वेज को लेकर वो और मजबूत बन चुकी
थी ऐसे इंसीडेंट्स ने एक बड़ा इंपैक्ट डाला आने वाले सालों में साल 1965 में इंडिया पाकिस्तान के बीच में वॉर होती है और इस वॉर के बाद ईस्ट पाकिस्तान एक कमजोर डिफेंस के साथ रह जाता है जो इकोनॉमिक और पॉलिटिकल इंबैलेंस था ईस्ट पाकिस्तान और वेस्ट पाकिस्तान में वो इस वॉर के बाद और उभर के आने लगता है इसी रीजन से एक सिक्स पॉइंट डिमांड उठाई जाती है ईस्ट पाकिस्तान के इकोनॉमिक डेवलपमेंट को लेकर ये डिमांड उठाते हैं शेख मुजीबुर रहमान जो कि आवामी लीग पॉलिटिकल पार्टी के एक फाउंडिंग लीडर थे इस डिमांड के छह पॉइंट्स देश हिला देने
वाले होते हैं सबसे पहला पॉइंट ही इसमें लिखा गया था कि पाकिस्तान को एक फेडरेशन स्टेट बनाया जाए और जो ईस्ट पाकिस्तान का रीजन है उसे और ज्यादा ऑटोनॉमी दी जाए जो रिसोर्सेस हैं ईस्ट पाकिस्तान के अंदर वो ईस्ट पाकिस्तान की सरकार को दिए जाए दो सेपरेट करेंसीज हो पाकिस्तान में एक वेस्ट पाकिस्तान के लिए एक ईस्ट पाकिस्तान के लिए ई पाकिस्तान के अपने इंडिपेंडेंट फॉरेन रिजर्व्स हो इनफैक्ट एक सेपरेट मिलिट्री फोर्स भी हो मतलब ये मांगे कुछ ऐसी है कि मानो कि ईस्ट पाकिस्तान को एक अपना अलग ही देश सा बना दिया जाए यह सुनकर ओबवियसली वेस्ट पाकिस्तान की सरकार
बिल्कुल भी खुश नहीं होती सारी डिमांड्स को रिजेक्ट कर दिया जाता है और इनफैक्ट वेस्ट पाकिस्तान की सरकार कहती है कि इस तरीके की डिमांड उठाना एक सेपरेटिस्ट मांग है देश के खिलाफ जाना हुआ यह देश को बांटने की बात करने जैसा हुआ इसी के चलते 19 जून 1968 को उस वक्त पाकिस्तान में अयूब खान की सरकार थी वह शेख मुजीबुर रहमान को अरेस्ट कर लेती है साथ में 34 और बंगाली सिविल और मिलिट्री ऑफिसर्स को अरेस्ट किया जाता है पाकिस्तान के खिलाफ कंस्पिरेशन रचने के लिए इन पर सेडिशन का केस लगाया जाता है इस केस को पॉपुलर बुलाया जाता है अगरतला कंस्पिरेशन केस
जनरल अयूब खान का कहना था कि शेख मु और उनके साथी इंडियन गवर्नमेंट के साथ अगरतला में कोलैबोरेट कर रहे हैं जिससे कि वह एक आजाद बांग्लादेश बना पाएं अगरतला त्रिपुरा में है अगर आप भूल गए हो तो अब इस पॉइंट ऑफ टाइम तक शेख मुजीबुर रहमान बड़े पॉपुलर पॉलिटिकल लीडर बन चुके थे बंगाली लोगों की आवाज थे वो इस पाकिस्तान में रहने वाले बंगाली लोगों को जो भी अत्याचार डिस्क्रिमिनेशन और इन इक्वलिटी सहनी पड़ रही थी वो आवामी लीग और शेख मुजीबुर में ही अपनी उम्मीद ढूंढते थे तो उनके अरेस्ट होने के बाद लोग सड़कों पर उतर आए भारी प्रोटेस्ट देखने को मिले इन्हीं प्रोटेस्ट
के बीच एक शेख मुजीबुर के साथ ी सर्जेंट जहार उल्ला हाक जब यह जेल में बंद थे इन्हें एक प्रिजन गार्ड के द्वारा मार दिया जाता है यह सुनकर लोगों में और गुस्सा पनपता है मानो लोग रेवोल्यूशन करने को तैयार हो जनरल अयूब खान इस सिचुएशन को मध्य नजर रखते हुए 22 फरवरी 1969 को शेख मुजीबुर रहमान को जेल से रिहा कर देते हैं और जो अगरतला केस उन पर लगाया गया था उसे विड्रॉ कर लिया जाता है लेकिन इस पॉइंट तक डे मनस्ट्रेशन प्रोटेस्ट और लेबर स्ट्राइक्स इस हद तक बढ़ चुकी थी कि अयूब खान को खुद रिजाइन करना पड़ता है 1969 में यहां पर याद रखिए कि जनरल अयूब खान ने
अपने हाथों में सत्ता ली थी एक मिलिट्री कू के जरिए बेसिकली पाकिस्तान में उन्होंने पिछले 10 सालों से मिलिट्री डिक्टेटरशिप सी बना रखी थी खुद रिजाइन करने के बाद वह अपने सक्सेसर को अपॉइंट्स करते हैं कि वह पाकिस्तान में पहली जनरल इलेक्शंस करवाएंगे और वो इलेक्शंस करवाई जाती आ हैं साल 1970 में यह 1970 की इलेक्शंस के रिजल्ट्स बहुत ही चौका देने वाले होते हैं ईस्ट पाकिस्तान की पॉलिटिकल पार्टी आवामी लीग इन इलेक्शंस को जीत जाती है 313 में से 167 सीट्स इनके पास जाती हैं लेकिन शॉकिंग चीज यह थी कि इनमें से एक भी सीट वेस्ट पाकिस्तान में
यह नहीं जीतते पाकिस्तान का लेजिसलेच्योर में थी तो आवामी लीग ने 313 में से 167 जीती यानी ईस्ट पाकिस्तान में ऑलमोस्ट हर सीट जीत ली लेकिन वेस्ट पाकिस्तान में एक भी सीट नहीं जीती वेस्ट पाकिस्तान में पाकिस्तान पीपल्स पार्टी पीपीपी ने 88 सीट्स जीती और इस पीपीपी पार्टी ने ईस्ट पाकिस्तान में एक भी सीट नहीं जीती ये शॉकिंग रिजल्ट्स दिखाते हैं कि जो दो हिस्से थे पाकिस्तान के उनके बीच में दरार कितनी गहरी हो चुकी थी अब ईस्ट पाकिस्तान में लोगों की पॉपुलेशन ज्यादा थी तो सीटें भी ज्यादा थी इसीलिए आवामी लीग को यहां पर विजेता माना जाता है लेकिन एक ऐसी
पॉलिटिकल पार्टी पाकिस्तान में सरकार बनाएगी जिसने एक भी सीट वेस्ट पाकिस्तान में नहीं जीती जो वेस्ट पाकिस्तान के पॉलिटिकल लीट्स हैं उनके इंटरेस्ट से बिल्कुल भी मैच नहीं होता इन इलेक्शन रिजल्ट्स को देखकर जो पीपीपी के लीडर थे उस वक्त जुल्फिकार अली भुट्टो वो आर्मी ऑफिशल्स और जनरल याहिया खान के साथ मिलते हैं और डिस्कस करते हैं कि कैसे नेशनल असेंबली को कैंसिल कर देना चाहिए लिटरली उनकी मर्जी के इलेक्शन रिजल्ट्स नहीं है तो इन इलेक्शंस को के रिजल्ट्स को खारिज कर दो और जनरल यया खान एगजैक्टली यही करते हैं 1 मार्च 1971 को कैंसिलेशन की
अनाउंसमेंट करी जाती है कि जो भी इलेक्शन रिजल्ट आए हैं भाई खत्म समझो इन्हे यह सुनकर ईस्ट पाकिस्तान में हल्ला मच जाता है वहां के लोग कहते हैं कि ये क्या मजाक चलने लग रहा है यह कोई डेमोक्रेसी हुई हमने वोट दिया हमारी मर्जी की पार्टी जीती और क्योंकि तुम्हें पसंद नहीं आ रहा तुम इलेक्शंस को कैंसिल कर दोगे उठाकर सड़कों पर फिर से भारी प्रोटेस्ट उतरते हैं और इस बारी आजादी के नारे लगाए जा आते हैं वो कहते हैं कि अगर तुम्हें हमारे लीडर्स को इलेक्ट करने में इंटरेस्ट ही नहीं है तो बाहर निकलो साइड में हमें आजादी दो हम अपना अलग से देश बनाएं यह फाउंडेशन है
दोस्तों बांग्लादेशी लिबरेशन वॉर की इस पॉइंट तक आते-आते ईस्ट पाकिस्तान में रहने वाले लोग इस्लाम को एज अ यूनिफाइड नहीं देखते थे बल्कि वह अपनी बंगाली एथनिक को ज्यादा इंपॉर्टेंस देते थे वो चाहते थे एक सेकुलर डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट स्टेट बने जिसमें बंगाली एथनिक यहां पर मेन चीज हो यहीं से ही ये कंट्री का का नाम आया है बांग्लादेश बंगाली लोगों का देश 7थ मार्च 1971 कैंसिलेशन के ऑर्डर्स दिए जाने के बाद आवामी लीग पॉलिटिकल पार्टी जनता के सपोर्ट में उतरती है और कहती है कि यहां पर हम नॉन कोऑपरेशन मूवमेंट चालू करेंगे वेस्ट पाकिस्तान में बैठी सरकार को कुछ भी
कह लेने दो हम उनकी सुनने ही नहीं वाले शेख मुजीब यहां पर एक बहुत ही जबरदस्त स्पीच देते हैं रेस कोर्स के ग्राउंड पे एक बड़ी ही ऐतिहासिक स्पीच बांगला मानुष मुक्ति चाय बांगला मानुष चाय बांगला मानुष ध चाय नारे लगाए जाते हैं आवर स्ट्रगल इ फॉर आवर फ्रीडम आ स्ट्रगल इ फॉर आवर इंडिपेंडेंस जॉय बंगला संग्राम हमद मुक्ति संग्राम संग्राम संग्राम अब इस पॉइंट पर दोस्तों जो ईस्ट पाकिस्तान में रहने वाले बंगाली लोग थे और जो उर्दू स्पीकिंग बिहारी लोग थे जिनका मेंशन मैंने वीडियो के शुरू में किया था इनके बीच में तनाव बढ़ने लग लगता है
क्योंकि जो बिहार से उर्दू स्पीकिंग लोग आए थे उन्हें प्रो पाकिस्तान देखा जा रहा था प्रो वेस्ट पाकिस्तान क्योंकि वो उर्दू में बात करते थे और जनरली वो वेस्ट पाकिस्तान के सपोर्ट में रहते थे तो कई अटैक्स देखने को मिले प्रोटेस्ट के बीच में बिहारी कम्युनिटीज के अगेंस्ट और मार्च 1971 में पाकिस्तान की आर्मी इसे एज एन एक्सक्यूज यूज करती है इंटरवेनर के लिए पाकिस्तानी आर्मी कुछ प्रो पाकिस्तान बंगाली को अपने ऑपरेशंस के लिए रिक्रूट करती है यह भी एक बड़ी इंटरेस्टिंग चीज है ऐसा नहीं था कि हर कोई जो ईस्ट पाकिस्तान में था वह अपने लिए एक आजाद देश देखना
चाहता था स्पेशली एक पॉलिटिकल पार्टी थी जमात इस्लामी उसके पॉलिटिकल लीडर्स और सपोर्टर्स एक्चुअली में वेस्ट पाकिस्तान की सरकार को सपोर्ट करते थे तो उन्होंने पाकिस्तानी आर्मी के साथ कोलैबोरेट किया 10th और 13th मार्च के बीच में पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस की सारी इंटरनेशनल फ्लाइट्स को कैंसिल कर दिया जाता है और उन्हें अर्जेंटली कहा जाता है कि वह ढाका में फ्लाई करें कुछ सरकारी पैसेंजर्स को ले जाकर फ्लाई किया जा रहा है वहां पर कौन है यह लोग यह है पाकिस्ता तानी सोल्जर्स जिन्होंने सिविलियन ड्रेसेस पहन रखी हैं एक ऑपरेशन चलाने के लिए मीनवाइल ईस्ट
पाकिस्तान में प्रोटेस्टर्स ने अपने आप को ऑर्गेनाइज कर लिया है जो बंगाली नेशनलिस्ट हैं उन्होंने अपनी खुद की एक आर्मी बना ली है जिसे मुक्ति वाहिनी कहा जा रहा है मतलब द फोर्स ऑफ इंडिपेंडेंस मुक्ति वाहिनी गोरिला ऑपरेशंस कंडक्ट करती है वेस्ट पाकिस्तान की आर्मी के खिलाफ जो ईस्ट पाकिस्तान में मौजूद है यहां पर इंडियन आर्मी का भी कंट्रीब्यूशन आता है क्योंकि इंडियन आर्मी मुक्ति वाहिनी की फोर्सेस को ट्रेनिंग प्रोवाइड करती है गोरेला वॉर फेयर में इसके रिस्पांस में वेस्ट पाकिस्तान एक ईस्ट पाकिस्तान सेंट्रल पीस कमेटी बनाता है शांति वाहिनी बड़ा ही आइर
निक नाम है क्योंकि शांति वाहिनी ढेर सारे वॉर क्राइम्स करती है हजारों सिविलियंस को मारा जाता है औरतों पर अत्याचार होते हैं और स्पेसिफिकली इंटेलेक्चुअल जो लोग हैं उन्हें टारगेट करके मारा जाता है टीचर्स स्कॉलर्स और सोशल एक्टिविस्ट इन्हें बुद्धि जीी भी बुलाया जाता था इस पॉइंट ऑफ टाइम तक लॉ एंड ऑर्डर का पूरी तरीके से सत्य नाश हो चुका होता है ईस्ट पाकिस्तान बंगाली ने सारी इंस्ट्रक्शंस फॉलो करनी बंद कर दी है जो भी पाकिस्तान से आ रही हैं 25 मार्च 1971 वेस्ट पाकिस्तान की सरकार एक भयानक जेनोसाइड प्लान करती है ऑपरेशन सर्च लाइट इसका ऑब्जेक्टिव होता है
कि जो भी पॉपुलर लोग बांग्लादेश की आजादी की मांग कर रहे हैं उन्हें पकड़ पकड़ के मार डालो 25 मार्च की रात को हजारों पाकिस्तानी आर्मी के ट्रूप्स ढाका में मार्च करते हैं शेख मुजीबुर रहमान को अरेस्ट कर लिया जाता है और वेस्ट पाकिस्तान ले जाया जाता है लेकिन इस अरेस्ट से पहले शेख मुजीबुर ने ईस्ट पाकिस्तान को एक इंडिपेंडेंट कंट्री डिक्लेयर कर दिया था उन्होंने कहा था अब से हम पाकिस्तान का हिस्सा नहीं हैं अब से हम बांग्लादेश हैं इस डिक्लेरेशन को एक ट्रांसमिट के द्वारा किया गया था ट्रांसमिशन को होने में कुछ घंटे का समय लगा था तो मिडनाइट क्रॉस हो चुकी थी इसी
रीजन से दोस्तों आज के दिन 26 मार्च को बांग्लादेश का इंडिपेंडेंस डे मनाया जाता है 27 मार्च 1971 मेजर जियाउर रहमान इस डेक्ले को पब्लिक के सामने पढ़ते हैं और अनाउंस करते हैं कि बांग्लादेश अब एक आजाद देश है इसी रात ढाका यूनिवर्सिटी में दो स्टूडेंट डॉरमेट्रीज पर हमला किया जाता है और एक ही रात के अंदर 7000 स्टूडेंट्स मारे जाते हैं पाकिस्तान की आर्मी के द्वारा इस ऑपरेशन सर्च लाइट में 300 से ज्यादा बंगालियों का मैसे करर किया जाता है एक हफ्ते के अंदर आधे लोग जो ढाका शहर में रह रहे थे वह शहर छोड़कर भाग जाते हैं सारे फॉरेन जर्नलिस्ट को डिपोर्ट कर दिया
जाता है और रेडियो ऑपरेशंस को भी शटडाउन कर दिया जाता है एक मिलिट्री अपॉइंटेड पाकिस्तानी जर्नलिस्ट एंथनी मास्क एन हास यूनाइटेड किंगडम भाग जाते हैं और 13 जून 1971 को जो उन्होंने देखा था उसे एक आर्टिकल में पब्लिश करते हैं द संडे टाइम्स में इस आर्टिकल के जरिए पहली बार बाकी दुनिया को पता चलता है कि यहां बांग्लादेश में एक्चुअली में होने क्या लग रहा है प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी खुद इस आर्टिकल को पढ़ती हैं और इससे मोटिवेट होती हैं कुछ एक्शन लेने को इस क्रैकडाउन के बाद आवामी लीग के कई पॉलिटिकल लीडर्स इंडिया भाग गए थे सेफ्टी के लिए 10th
अप्रैल को पीपल्स रिपब्लिक ऑफ बांग्लादेश गवर्नमेंट फॉर्म होती है एजाइल में कोलकाता में शेख मुजीबुर रहमान को प्रेसिडेंट डिक्लेयर कर दिया जाता है और तजुर्बे बॉर्डर क्रॉस करके इंडिया भागते हैं प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी यहां पर सोचती हैं मिलिट्री का इस्तेमाल करके इस वॉर में हिस्सा लेकर इन लोगों को बचाना ज्यादा इकोनॉमिकली फीजिबल होगा एज कंपेयर्ड टू इन 10 मिलियन रिफ्यूजीस की हम सहायता करने की कोशिश करें हमारे पास इतने पैसे नहीं होंगे 28 अप्रैल 1971 इंदिरा गांधी जनरल सैम मानेकशॉ को कहती हैं कि वह जंग की तैयारियां करें ईस्ट पाकिस्तान में
एंट्री करने के लिए रेडी हो जनरल सैम मानिक शो इतने कॉन्फिडेंट नहीं थे इनिशियली कि इतने कम टाइम में इंडिया प्रिपेयर्ड हो सकता है और इस जंग को जीत सकता है तो व शुरू में रिजेक्ट कर दे देते हैं और ऑफर करते हैं रिजाइन करने को लेकिन इंदिरा गांधी अपना कॉन्फिडेंस उन पर बनाए रखती हैं और उन्हें पूरी आजादी देती हैं कि जब उन्हें ठीक लगे तभी ऑपरेशन किया जाए उनके काम की शुरुआत होती है मुक्ति वाहिनी को ट्रेनिंग प्रोवाइड करने से जुलाई 1971 तक आते-आते इंदिरा गांधी ने एक्चुअली में ईस्ट पाकिस्तान को ईस्ट पाकिस्तान बुलाना बंद कर दिया है अब वो इसे बांग्लादेश करके
पुकारती हैं इस पॉइंट ऑफ टाइम तक अभी भी कोई कॉन्फ्लेट नहीं देखने को मिला है इंडिया और पाकिस्तान के बीच में डायरेक्टली ये सिर्फ ड दिसंबर 197 71 को जाकर ही होता है कि पाकिस्तान ऑपरेशन चेंस खान लॉन्च करता है और इंडिया के एयर फीड्स पर हमला बोल देता है पाकिस्तान को डर था कि इंडिया किसी भी वक्त मिलिट्री का इस्तेमाल करके इस वॉर में इंटरविलाउज ओबवियसली ये स्ट्रेटेजी किसी काम की नहीं होती क्योंकि इंडिया की जो मिलिट्री स्ट्रेटेजी थी और मिलिट्री पावर थी वो कहीं ज्यादा बेहतर होती है पाकिस्तान के कंपैरिजन में इंडिया का रिस्पांस था कि
वेस्ट पाकिस्तान में डिफेंसिव मिलिट्री स्ट्रेटेजी चले और ईस्ट पाकिस्तान में एक कोऑर्डिनेटेड ऑफेंसिव थ्रस्ट हो यानी सोल्जर्स को ग्राउंड पर भेजा जाए इंडिया की वॉर में एंट्री करते ही पाकिस्तान यूनाइटेड नेशंस को अपील करता है कि इंडिया को सीज फायर करने के लिए फोर्स किया जाए यूनाइटेड नेशंस का सिक्योरिटी काउंसिल फथ दिसंबर को असेंबल करता है बड़ी लंबी चर्चा चलती है उस वक्त यूएसए पाकिस्तान के फेवर में ज्यादा था और सोवियत यूनियन इंडिया के फेवर में ज्यादा था तो यूएस चाइना और यूके एक्चुअली में सब सपोर्ट करते हैं कि इंडिया इमीडिएट सीज फायर कर दे और अपने
ट्रूप्स को विथड्रावल को वीटो कर देता है दो बार और बंगाली इस के खिलाफ जो एट्रोसिटी हो रही थी उन्हें ध्यान में रखकर बाद में जाकर यूके और फ्रांस भी वोट करने से एब्स्टेंड पहला देश बनता है बांग्लादेश को ऑफिशियल रिकॉग्नाइज करने वाला इसी दिन इंडिया भी बांग्लादेश को ऑफिशियल रिकॉग्नाइज कर लेता है 12 दिसंबर तक आते-आते इंडिया पाकि तान के बीच वॉर में पाकिस्तान एक बहुत बड़ी हार को अपने सामने देख रहा है पाकिस्तान के डेप्युटी प्राइम मिनिस्टर फॉरेन मिनिस्टर जुल्फिकार अली भुट्टो जल्दी से न्यूयॉर्क जाते हैं अमेरिका के साथ डिस्कस करने के लिए किस
तरीके से यहां पर एक सीज फायर का केस बनाया जा सके चार दिन लगते हैं इस प्रपोजल को फाइनलाइज करने में लेकिन तब तक ईस्ट पाकिस्तान में पाकिस्तान की मिलिट्री ऑलरेडी सरेंडर कर चुकी होती है यह वॉर खत्म हो जाती है जुल्फिकार अली भुट्टो फ्रस्ट्रेशन में आकर यूना नाटेड नेशंस में अपनी स्पीच रोककर काउंसिल छोड़कर चले जाते हैं यह वीडियो उनका आप यहां पर देख सकते हैं व्हाई शुड आई वेस्ट माय टाइम हियर इन द सिक्योरिटी काउंसिल आई एम गोइंग 16 दिसंबर 1971 इंडियन आर्मी ने ढाका शहर को चारों तरफ से घेर लिया है 30 मिनट दिए जाते हैं सरेंडर करने के लिए
पाकिस्तान की मिलिट्री को लेफ्टिनेंट जनरल आमिर अब्दुल्ला खान नियाजी बिना किसी रेजिस्टेंस के सरेंडर कर देते हैं इस पाकिस्तान में बैठी सरकार इमीडिएट कोलैक्स कर जाती है इसी दिन 16 दिसंबर 1971 हिस्टोरिक इंस्ट्रूमेंट ऑफ सरेंडर साइन किया जाता है 93000 से ज्यादा पाकिस्तानी ट्रूप सरेंडर करते हैं इंडियन फोर्सेस और बांग्लादेश लिबरेशन फोर्सेस के सामने ये दुनिया का लार्जेस्ट सरेंडर था वर्ल्ड वॉर ट के बाद से अगले साल 1972 में एक शिमला एग्रीमेंट साइन करी जाती है इंडिया और पाकिस्तान के बीच में इस एग्रीमेंट के अनुसार पाकिस्तान रिकॉग्नाइज करता है
बांग्लादेश को एज एन इंडिपेंडेंट कंट्री लेकिन पाकिस्तान को यह करने के बदले क्या मिलता है इंडिया प्रॉमिस करता है पाकिस्तान को कि जो 93000 पाकिस्तान के प्रिजनर्स ऑफ वॉर हैं उन्हें वापस पाकिस्तान रिलीज कर दिया जाएगा 5 महीने के अंदर-अंदर और जो 13000 स्क्वायर किलोमीटर जमीन इंडियन ट्रूप्स ने वेस्ट पाकिस्तान में कब्जा ली थी उसे भी इंडिया वापस कर देगा वेस्ट पाकिस्तान को कुछ इस तरीके से दोस्तों जन्म होता है एक नए देश का बांग्लादेश 1972 में पाकिस्तान के द्वारा रिकॉग्नाइज किए जाने के बाद 1974 में यूनाइटेड नेशंस भी बांग्लादेश को एज एन
Total Wars & Major Conflicts Between India and Pakistan
| No. | War / Conflict Name | Year | Duration | Main Cause | Outcome |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | First Kashmir War | 1947–1948 | ~1 year | Partition of India & Kashmir dispute | Ceasefire; Kashmir divided (LoC formed) |
| 2 | Second India–Pakistan War | 1965 | 17 days | Pakistan’s Operation Gibraltar in Kashmir | Stalemate; Tashkent Agreement |
| 3 | Bangladesh Liberation War | 1971 | 13 days | East Pakistan oppression & refugee crisis | India victory; Bangladesh formed |
| 4 | Siachen Conflict | 1984–2003 | Ongoing (low intensity) | Control of Siachen Glacier | India controls Siachen |
| 5 | Kargil War | 1999 | ~2 months | Pakistani infiltration in Kargil | India victory; Pakistan withdrew |
| 6 | Parakram Standoff | 2001–2002 | 10 months | Indian Parliament attack | No full war; military mobilization |
| 7 | Uri Surgical Strikes | 2016 | Short-term | Terror attack on Uri Army base | India conducted surgical strikes |
| 8 | Balakot Air Strike | 2019 | 3 days | Pulwama terror attack | India carried out air strikes in Pakistan |
इंडिपेंडेंट कंट्री रिकॉग्नाइज कर लेता है दूसरी तरफ पाकिस्तान में याहिया खान की डिक्टेटरशिप कोलैक्स कर जाती है और भुट्टो को 20 दिसंबर 1971 को नया प्रेसिडेंट स्वन इन किया जाता है शिमला एग्रीमेंट के अनुसार मुजीबुर रहमान को भी जेल से रिलीज किया जाता है वह ढाका लौटते हैं एक हीरो की तरह 1973 में जब इलेक्शंस होती है बांग्लादेश में लैंड स्लाइड मेजॉरिटी के साथ वो इलेक्शंस जीतते हैं आवामी लीग उनकी पॉलिटिकल पार्टी पावर में आती है लेकिन अनफॉर्चूनेटली कहानी में यहां इतनी कोई हैप्पी एंडिंग नहीं है इस पॉइंट ऑफ टाइम पर क्योंकि बात क्या है दोस्तों जिस
प्रॉब्लम से पाकिस्तान सफर कर रहा था कांस्टेंटली मिलिट्री डिक्टेटरशिप्स उसी प्रॉब्लम से कुछ हद तक बांग्लादेश भी अब सफर करने लगता है मुजीबुर रहमान एक सेकुलर आदमी थे जिन्होंने जमात इस्लामी पर बैन लगा दिया था उन्होंने सार पॉलिटिकल पार्टीज पर बैन कर दिया जो धर्म के आधार पर बनी थी पावर लेने के बाद लेकिन 15 अगस्त 1975 को शेख मुजीबुर रहमान को एसिनेट कर दिया जाता है उनके पूरे परिवार के साथ सिर्फ उनकी दो बेटियां जिंदा बचती हैं जो उस वक्त जर्मनी में थी यह कहानी को मैं बहुत शॉर्ट में बता रहा हूं क्योंकि और बहुत सारी कॉम्प्लेक्शन इवॉल्वड है
यहां पर 1975 में जनरल जियाह रहमान पावर पर कब्जा जमाते हैं और पब्लिक नैरेटिव को चेंज करने की कोशिश करते हैं यानी बांग्लादेश में भी एक मिलिट्री क देखने को मिलता है ये मिलिट्री को हीरोज की तरह पोट्रे करते हैं जमात इस्लामी पर जो बैन लगा था उसे हटा दिया जाता है और अगले कई सालों तक बांग्लादेश एक सेकुलर डेमोक्रेसी बना रहने की जगह एक मिलिट्री डिक्टेटरशिप बना रहता है साल 2009 में मुजीबुर रहमान की बेटी शेख हसीना पावर में आती हैं और आज के दिन तक भी शेख हसीना ही पावर में है करंट प्राइम मिनिस्टर है बांग्लादेश की आवामी लीग रूलिंग पार्टी है इस पूरी कहानी
में क्या लेसन आपको सीखने को मिलता है नीचे कमेंट्स में लिखकर बताओ आपकी राय में क्या लेसन सीखा आपने इस पूरी कहानी से मेरी राय में एक बड़ा लेसन जो यहां पर सीखने को मिलता है इस बांग्लादेश की स्टोरी से वो लैंग्वेज इंपोजिशन का है शायद अगर जिन्ना ने उर्दू भाषा को इस तरीके से इंपोज करने की कोशिश ना करी होती और बंगाली लोगों को एक बराबर ट्रीट किया होता वेस्ट पाकिस्तान के लोगों के तो शायद कभी बांग्लादेश देश एजिस्ट ही ना करता या फिर यह फिर भी होता क्योंकि ज्योग्राफिकली ये दोनों रीजंस इतने अलग हैं एक दूसरे से कल्चर इनके इतने अलग हैं कि यूनाइटेड रहना
बहुत ही मुश्किल था आज के दिन कहना बड़ा मुश्किल है कि क्या होता लेकिन फ्यूचर में सीख जरूर ली जा सकती है वीडियो पसंद आया ऐसे ही और हिस्टोरिकल वीडियोस देख सकते हैं इंदिरा गांधी की 1975 वाली इमरजेंसी वाला वीडियो जरूर रिकमेंड करूंगा इसके बाद आप जाकर देख सकते हैं यहां क्लिक करके बहुत-बहुत [संगीत] धन्यवाद ब [संगीत]